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ये कैसी व्यवस्था: वाराणसी में 400 किमी सीवर-पानी की लाइन साथ, 28 वार्ड के 1.50 लाख लोग प्रभावित

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Fri, 02 Jan 2026 01:43 PM IST
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सार

Varanasi News: वाराणसी शहर के 28 वार्डों के करीब 1.50 लाख लोग दूषित जलापूर्ति की समस्या झेल रहे हैं। इन इलाकों में करीब 400 किलोमीटर सीवर लाइन और पानी की पाइप लाइन एक साथ है। शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।   

Varanasi 1.50 lakh people across 28 wards affected by 400 km long sewer and water lines
जलकर विभाग कार्यालय के सामने फूटी पाइप लाइन। - फोटो : अमर उजाला
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जीने के लिए जिस चीज की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उस पीने के पानी पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। जिम्मेदारों के आंख मूंदने से आम जनता को खामियाजा उठाना पड़ रहा है। शहर के 28 वार्डों के करीब 1.50 लाख लोग दूषित जलापूर्ति की समस्या झेल रहे हैं। इन इलाकों में करीब 400 किलोमीटर सीवर लाइन और पानी की पाइप लाइन एक साथ है। हर महीने औसतन 250 शिकायतें आ रही हैं। बावजूद इसके समस्या अब तक दूर नहीं हुई है।

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दूषित जलापूर्ति में लीकेज बड़ा कारण है, जिसके चलते पेयजल और सीवर का पानी मिश्रित होकर जा रहा है। इसका उदाहरण बेनियाबाग के पास जलकल कार्यालय के नजदीक देखा जा सकता है। यह समस्या बीते 15 दिनों से बनी हुई है। बावजूद इसके अब तक लीकेज दुरुस्त नहीं की गई।
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शहर की 18 लाख आबादी को पेयजल मुहैया कराने की जिम्मेदारी जलकल पर है। प्रति व्यक्ति 132 लीटर पानी की खपत का पैमाना तय है। ऐसे में 290 एमएलडी पानी रोज चाहिए, लेकिन बमुश्किल 170 एमएलडी पानी ही लोगों के घरों तक पहुंचाया जा रहा है। जर्जर पाइपलाइन और लोगों के सचेत न होने से इसमें से भी काफी पानी बर्बाद हो जाता है।

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संबंधित विभागों की लापरवाही के चलते लोगों को शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है। करीब 100 साल से अधिक पुरानी पानी की पाइपलाइनें जर्जर हो चुकी हैं। इससे पानी लीकेज के जरिए बहकर बर्बाद हो रहा है। इन पाइपलाइनों की कभी-कभार मरम्मत हो जाती है। पूर्व में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के भू-भौतिकी विभाग की जांच रिपोर्ट में कहा गया था कि शहर में क्षतिग्रस्त सीवर लाइनें पीने योग्य पानी को प्रदूषित कर रही हैं।

पानी लीकेज की शिकायतें अधिकतर इलाकों से आ रही हैं, लेकिन पक्का महाल में इसका संकट सबसे अधिक है। खास तौर पर ईश्वरगंगी, दारानगर, औसानगंज, नाटीइमली, चौकाघाट, गायघाट, रामघाट, दशाश्वमेध, शिवाला, भदैनी, मदनपुरा, भेलूपुर आदि इलाके प्रभावित हैं।

372 किमी जर्जर लाइन बदलने के लिए 823 करोड़ रुपये की योजना

शहर के 18 वार्डों में 372 किमी जर्जर सीवर और पेयजल पाइपलाइनों को बदलने के लिए 823 करोड़ रुपये की योजना बनाई गई है। इससे सीवर ओवरफ्लो और पानी की बर्बादी की समस्या खत्म होगी। इससे तकरीबन चार लाख लोग और 100 मोहल्ले लाभान्वित होंगे। ये इलाके गंगा घाटों के आसपास हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी
बेनियाबाग की समस्या जल्द दूर हो जाएगी। भीड़-भाड़ के कारण खोदाई संभव नहीं है। दूषित जल से जुड़ी जो भी शिकायतें आती हैं, उन्हें दूर कराया जाता है। 18 वार्डों में नई पाइपलाइन डालने की योजना बनाई गई है। जल्द काम शुरू होगा। -विश्वनाथ गुप्ता, सचिव, जलकल

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