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कथावाचक का तंज : शिवपुराण कथा के दौरान नेताओं पर तीखे बोल, कथाव्यास का वीडियो वायरल

कमल कांडपाल Published by: गायत्री जोशी Updated Tue, 17 Feb 2026 12:55 PM IST
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सार

शिवपुराण कथा के व्यास कौस्तुभानंद जोशी का नेताओं को आड़े हाथों लेता हुआ एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वह नेताओं के लिए कई तीखे शब्द कहते हुए सुने जा रहे हैं।

Politicians will not be given the microphone during the Katha; leaders insist on opening liquor shops
कथावाचक कौस्तुभानंद जोशी। - फोटो : संवाद
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विस्तार

बागेश्वर में राजनीति का गिरता स्तर पर अब उपहास और निंदा का कारण बनने लगा है। हालात यह हैं कि कथावाचक भी व्यास गद्दी पर बैठकर नेताओं पर निशाना साध रहे हैं। कांडा के गोपेश्वर महादेव मंदिर में चल रही शिवपुराण कथा के व्यास कौस्तुभानंद जोशी का नेताओं को आड़े हाथों लेता हुआ एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वह नेताओं के लिए कई तीखे शब्द कहते हुए सुने जा रहे हैं।

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कथा के दौरान व्यास जोशी कहते हैं कि वर्तमान समय में नेताओं को संत नहीं एजेंट चाहिए जो उनकी जय जयकार करें और भीड़ जुटाकर वोट बैंक पक्का कर सकें। कहा कि मैंने शिव पुराण की कसम खाई है कि किसी भी नेता को कथा के दौरान माइक नहीं देंगे। यहां तक कि अपने पास नेताओं को बैठने तक की इजाजत भी नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि आज के नेता किसी लायक नहीं हैं। कपकोट विधानसभा क्षेत्र में हर पांच-पांच मिनट की दूरी पर शराब के ठेके खुल गए हैं और घर-घर में बीयर बार जैसी स्थिति पैदा कर दी गई है। इसके उलट जो गरीब किसान अपने खेत में भांग उगा रहे हैं उन पर कार्रवाई की जा रही है। स्थिति यह हो गई है कि शिवरात्रि के दिन भगवान शिव पर चढ़ाने के लिए भांग की पत्ती नहीं मिल रही है। उन्होंने सवाल किया कि क्या शराब परोसने से समाज नशा मुक्त होगा।

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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

कथावाचक के इस बयान का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पर लोग आज की व्यवस्थाओं पर जमकर तंज कस रहे हैं। विपक्षी पार्टिंयां इसे वर्तमान सत्ताधारी दल की विफलता बताते हुए तंज कस रही है कि सत्ताधारी दल ने राजनीति को बदनाम कर दिया है। वायरल वीडियो में हर वर्ग की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

कथाव्यास का बयान उनका निजी विचार है। संत का काम समाज को सही रास्ते पर ले जाना है। उन्होंने महाशिवरात्री पर पूजा के लिए भांग के पत्ते न मिलने पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार पहाड़ से भांग को उजाड़ने में लगी है लेकिन शराब की दुकानें बढ़ते जा रही हैं। कथाव्यास को समाज सुधारक के रूप में माना जाता है। शंकराचार्य का अपमान होने के बाद संत समाज में नाराजगी है जाे अब इन मंचों के माध्यम से खुलकर सामने आ रही है। -अर्जुन भट्ट, जिलाध्यक्ष कांग्रेस बागेश्वर

मेरे कार्यकाल में कोई भी शराब की दुकान नहीं खुली है। कथाव्यास अगर इस तरह का कोई बयान दे रहे हैं तो उन्हें इसका स्पष्टीकरण भी देना चाहिए। तथ्यों के साथ पांच किमी के दायरे में खुली दुकानों का विवरण साझा करना चाहिए। व्यास की गद्दी से राजनीति नहीं होनी चाहिए। चीजों का अध्ययन कर इस तरह के बयान देने चाहिए। -सुरेश गढि़या, विधायक कपकोट

कथा के दौरान राजा और प्रजा के प्रसंग में आज की स्थितियों की तुलना की थी। नेताओं के अच्छे काम की सराहना और बुरे कार्य की निंदा होना स्वाभाविक है। मैं कपकोट में कराए गए पैराग्लाइडिंग जैसे साहसिक आयोजन का प्रशंसक हूं लेकिन शराब की दुकानों की बढ़ती संख्या की निंदा भी जरूरी है। जो नेता जनता का भला नहीं सोचता, वह नालायक ही कहलाता है। मेरा वक्तव्य किसी दल विशेष या नेता विशेष के लिए नहीं है, न ही मैं किसी दल, विचारधारा या नेता के पक्ष में हूं। मेरा स्पष्ट मानना है कि जो नेता जनता के हित में कार्य नहीं करेगा, उसे जनता ने वोट की ताकत का अहसास कराना चाहिए। -कौस्तुभानंद जोशी, कथाव्यास

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