मनरेगा योजना के नाम बदलने को लेकर कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर है। ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ अभियान के तहत कांग्रेस बिहार के प्रत्येक जिले में धरना-प्रदर्शन और उपवास कर रही है। कांग्रेस का आरोप है कि मनरेगा जैसी ऐतिहासिक और जनकल्याणकारी योजना को कमजोर करने की साजिश रची जा रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि योजना के नाम से महात्मा गांधी का नाम हटाने की कोशिश न केवल योजना की भावना के खिलाफ है, बल्कि राष्ट्रपिता का घोर अपमान भी है।
इसी मुद्दे पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कांग्रेस के आरोपों पर सवाल खड़े करते हुए पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम केवल “हाय-तौबा मचाना” है और कांग्रेस वही कर रही है। विपक्ष जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है, जबकि केंद्र सरकार की योजनाओं से आम लोगों को लाभ मिलने वाला है।
नित्यानंद राय ने कहा कि केंद्र सरकार मनरेगा के तहत रोजगार के अवसर बढ़ाने जा रही है। उन्होंने बताया कि 100 दिन के रोजगार के स्थान पर अब 125 दिन तक रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही उन्होंने सरकार की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का भी उल्लेख किया।
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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मनरेगा कानून वर्ष 2005 में बनाया गया था और तब से लेकर अब तक ग्रामीण परिदृश्य में व्यापक बदलाव आ चुका है। ऐसे में कानून में संशोधन की आवश्यकता महसूस की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अपेक्षाकृत समृद्ध और विकसित राज्य भी इस योजना का लाभ ले रहे हैं, जहां इसकी वास्तविक आवश्यकता नहीं है, जिससे यह योजना अपने इच्छित लक्ष्य को पूरी तरह हासिल नहीं कर पा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में भारत सरकार मनरेगा पर सालाना लगभग 86 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है, इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में अपेक्षित विकास दिखाई नहीं दे रहा है। इसी कारण योजना में बदलाव और सुधार जरूरी हो गया है।