बालोद जिले के लोहारा क्षेत्र में आज किसानों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा और जिला किसान संघ ने खरखरा जलाशय की ऊंचाई बढ़ाने की सरकारी परियोजना और धान खरीदी में व्याप्त अव्यवस्थाओं के विरोध में एक विशाल रैली निकाली और बाजार चौक पर जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी जमीनें डूबती हैं और मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
बांध परियोजना का कड़ा विरोध, डूबान का मुद्दा
जिला किसान संघ के अध्यक्ष गैंद सिंह ठाकुर ने बताया कि 100 करोड़ रुपये की लागत से खरखरा जलाशय की ऊंचाई 6 फीट बढ़ाई जा रही है। इससे करीब एक दर्जन गांव डूबान की चपेट में आ जाएंगे। उन्होंने कहा कि पहले भी बांध निर्माण के समय किसानों को न उचित मुआवजा मिला और न ही नौकरी, और अब फिर से सैकड़ों किसानों को बेघर करने की तैयारी है। उन्होंने मांग की कि जब तक विस्थापन और मुआवजे की ठोस नीति नहीं बनती, यह परियोजना रद्द की जानी चाहिए।
धान खरीदी में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था पर सरकार को घेरा
पूर्व विधायक और मुक्ति मोर्चा नेता जनक लाल ठाकुर ने सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि धान खरीदी की ऑनलाइन प्रक्रिया ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है। ठाकुर ने सवाल उठाया कि प्रदेश में अरबों रुपये का धान घोटाला हो रहा है और 700 ट्रक धान कहां गायब हो गए, इसका जवाब सरकार के पास नहीं है। उन्होंने कहा कि किसान टोकन के लिए भटक रहे हैं और बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों को कोई राहत नहीं मिल रही है।
किसानों की प्रमुख 9 सूत्रीय मांगें
किसानों ने प्रशासन को अपनी 9 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। इनमें मुख्य रूप से खरखरा बांध की ऊंचाई बढ़ाने का फैसला तुरंत वापस लेना, धान खरीदी के लिए पुरानी ऑफलाइन टोकन व्यवस्था बहाल करना, गांवों में संपत्ति कर वसूली बंद करना और स्मार्ट मीटर योजना वापस लेना शामिल है। उन्होंने बढ़ी हुई भूमि रजिस्ट्री दरों को घटाकर पुरानी दरें लागू करने तथा ग्राम कोटेरा में राइस मिल के लिए जरूरत से ज्यादा (40 एकड़) जमीन अधिग्रहित करने की जांच की भी मांग की।
जर्जर बांधों की मरम्मत पर ध्यान देने की मांग
प्रदर्शन के दौरान ग्राम माटरी और भंवरमरा के बांधों की जर्जर स्थिति का मुद्दा भी उठा। किसानों ने बताया कि बांधों से पानी का रिसाव खेतों में जा रहा है, जिससे फसलें बर्बाद हो रही हैं। उन्होंने नए प्रोजेक्ट लाने के बजाय सरकार से पुराने और जर्जर बांधों की मरम्मत पर ध्यान केंद्रित करने की मांग की।