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महासमुंद: करोड़ों की गैस से भरे कैप्सूल ट्रकों का गबन और कालाबाजारी, आरोपी पिता पुत्र गिरफ्तार
महासमुंद जिले के सिंघोड़ा थाना क्षेत्र से जब्त करोड़ों रुपये मूल्य की गैस से भरे कैप्सूल ट्रकों के गबन और कालाबाजारी के मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी संतोष सिंह ठाकुर और उसके पुत्र सार्थक सिंह ठाकुर को पुलिस ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर से गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए होटल में छिपकर रह रहे थे। पुलिस ने मामले में संलिप्त खाद्य अधिकरी अजय यादव सहित अन्य 3 आरोपी पंकज चंद्राकर, निखिल वैष्णव और मनीष चौधरी को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। अधीक्षक अधीक्षक प्रभात कुमार ने खुलासा करते हुए बताया कि, मामले में मुख्य आरोपी संतोष ठाकुर और उसका पुत्र सार्थक घटना के बाद से फरार थे। उनकी तलाश में महासमुंद पुलिस ने रायपुर, कवर्धा, छुईखदान, कान्हा-किसली, कोलकाता, पुणे, मुंबई और कोल्हापुर तक अलग-अलग टीमें रवाना की थीं। सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज, टोल प्लाजा डेटा और तकनीकी विश्लेषण के बाद पुलिस को सूचना मिली कि, दोनों आरोपी महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित न्यू चालुक्य होटल में छिपे हुए हैं। इसके बाद स्थानीय पुलिस के सहयोग से दबिश देकर शांति बिहार कालोनी डगनिया थाना डीडी नगर रायपुर निवासी संतोष सिंह ठाकुर (57) और उसके पुत्र सार्थक सिंह ठाकुर (27) को गिरफ्तार किया।
पुलिस ने संतोष ठाकुर के कब्जे से 20 हजार रुपये नकद भी जब्त किया है। एसपी ने बताया कि, सिंघोड़ा में दर्ज अपराध क्रमांक 96/25 के तहत 24 दिसंबर 2025 को 6 एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रकों को जब्त किया गया था। भीषण गर्मी और सुरक्षा कारणों को देखते हुए इन वाहनों को सुरक्षित स्थान पर रखने के लिए जिला प्रशासन के निर्देश पर, खाद्य विभाग की मौजूदगी में, 30 मार्च 2026 को इन्हें ठाकुर पेट्रोकैमिकल्स, उरला रायपुर के संचालक संतोष सिंह ठाकुर के सुपुर्द किया गया था। जांच में खुलासा हुआ कि, सुपुर्द किए गए ट्रकों में से 5 कैप्सूल ट्रकों में भरी करीब 87 टन एलपीजी गैस (कीमत लगभग 77 लाख रुपये) का आपराधिक षड्यंत्र के तहत गबन कर लिया गया। पुलिस ने इसे आपराधिक न्यास भंग, कूट रचना और कालाबाजारी का गंभीर मामला मानते हुए संतोष ठाकुर सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ बीएनएस और आवश्यक वस्तु अधिनियम की विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज किया था। पुलिस के मुताबिक मामले की विवेचना अभी जारी है और गैस हेराफेरी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
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