{"_id":"67ca8e5acc56b617ee078fda","slug":"video-a-unique-confluence-of-indian-tradition-and-modernity-was-seen-in-amity-utsav","type":"video","status":"publish","title_hn":"VIDEO : एमिटी उत्सव में दिखा भारतीय परम्परा और आधुनिकता का अनूठा संगम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
VIDEO : एमिटी उत्सव में दिखा भारतीय परम्परा और आधुनिकता का अनूठा संगम
नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 07 Mar 2025 11:42 AM IST
Link Copied
नोएडा के एमिटी यूनिवर्सिटी में देशभर की 148 यूनिवर्सिटी से आए करीब ढाई हजार छात्र एमिटी उत्सव में शामिल हुए। इस दौरान छात्रों ने आयोजित कई प्रतियोगिताओं में अपने हुनर का प्रदर्शन किया। जहां पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ साथ भारतीय पारंपरिकता और आधुनिकता का अनूठा संगम देखने को मिला।
शहर के सेक्टर 125 स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी में 3 मार्च से शुरू हुए एमिटी उत्सव 7 मार्च तक चलेगा। आयोजकों ने बताया कि इस दौरान देशभर की 148 यूनिवर्सिटी से आए करीब ढाई हजार छात्रों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। उनमें से एक प्रतियोगिता इंटेलीस्शन आर्ट की हुई। जहां देशभर आए छात्रों ने अपने अपने राज्यों की संस्कृति को व्यर्थ हो चुके समानों से तैयार कर मॉडल तैयार किए। इस दौरान झारखंड के रांची से आए चार छात्रों के ग्रुप खुश्बू कुमारी, धीरज, शीतल, नाहिद ने बताया कि झारखंड में पुराने समय में शादी ब्याह के समय घरों पर परिवार मिलकर दीवारों की पेंटिंग करता है, जहां आकर्षक डिजाइन तैयार की जाती है। उस आर्ट को सोहराई आर्ट कहते हैं। इसमें पूरी तरह प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है। इसमें फूल पत्तों से निकलने वाले रंगों का प्रयोग किया जाता है, जिसे झारखंड में बेहद शुभ माना गया। उन्होंने व्यर्थ हुई वस्तुएं जैसे लकड़ी के टुकड़े,दातून, फूलों, गाय के गोबर समेत अन्य वस्तुओं से नए दंपति के साथ का मॉडल तैयार किया। इसके साथ ही राजस्थान के जयपुर से आए छात्रों के समूह ऐश्वर्या, चेतना, पारुल, संस्कृति ने बताया कि उनके राज्य की मांडना कला तेजी से लुप्त होती जा रही हैं। उन्होंने उसी कला का प्रदर्शन किया है और होली के समय मां बेटे के वात्सल्य प्रेम को दर्शाते हुए पर्यावरण का संरक्षण दिया और मांडना कला तैयार कर प्रदर्शित किया। वहीं गुजरात के कच्छ से आए छात्रों के समूह सानिया सोनी, दर्जी दर्शन, कृषितबा, गोस्वामी ने बताया कि उन्होंने भारतीय प्राचीन काल से चले आ रहे योग के महत्व को समझाया है। भूसा, रेशे, लकड़ी के बोर्ड, नारियल के झाल, जूट की रस्सी का उपयोग कर एक महर्षि का मॉडल तैयार कर अंधकार से प्रकाश की ओर से के प्रति जागरूक किया। इसमें खासकर यम नियम आसान, प्रणामय समेत 8 प्रकार के बारे में बताया।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।