राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के छात्र पारंपरिक विधियों से हटकर बिना मिट्टी और सीमित पानी के वीटग्रास तैयार कर रहे हैं। इसके लिए हाइड्रोपोनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जो आधुनिक कृषि का मॉडल है। यह प्रोजेक्ट नई शिक्षा नीति (एनईपी ) के तहत छात्रों को रिसर्च आधारित शिक्षा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
बॉटनी विभागाध्यक्ष डॉ संघमित्रा ने बताया कि इस तकनीक में पौधों को मिट्टी की जरूरत नहीं होती। पौधों की जड़ों को पोषण देने के लिए विशेष खनिज (मिनरल्स) का घोल तैयार किया जाता है, जिससे पौधों का विकास तेजी से होता है। उन्होंने बताया कि पौधों की जड़ों को सहारा देने के लिए नारियल का बुरादा (कोकोपीट) या छोटे-छोटे पत्थरों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे पौधे स्थिर रहते हैं और उन्हें आवश्यक पोषण आसानी से मिल जाता है। इस प्रोजेक्ट के काफी अच्छे रिजल्ट मिल रहे हैं।
पानी की खपत भी हो रही कम
छात्रों ने इस प्रोजेक्ट के तहत मोटर के माध्यम से पानी और पोषक तत्वों की आपूर्ति की व्यवस्था भी तैयार की है। यह सिस्टम ऑटोमैटिक तरीके से पौधों तक आवश्यक तत्व पहुंचाता है, जिससे पानी की खपत भी काफी कम हो जाती है। खास बात यह है कि इस तकनीक में कम जगह में अधिक उत्पादन संभव है।
डॉ संघमित्रा ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को प्रयोगात्मक और व्यावहारिक ज्ञान देना है, ताकि वे आधुनिक कृषि तकनीकों को समझ सकें और भविष्य में इसका उपयोग कर सकें। उन्होंने कहा कि छात्र अब इस तकनीक को अपने घरों में भी अपनाने लगे हैं। इसके जरिए टमाटर, पालक, धनिया जैसी सब्जियां आसानी से उगाई जा सकती हैं। हाइड्रोपोनिक तकनीक न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि यह शहरी क्षेत्रों में खेती के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है। इससे पानी की बचत होती है और उत्पादन भी बेहतर मिलता है।
स्वास्थ्य के भी फायदेमंद
प्रोजेक्ट पर काम करने वाली टीम का कहना है कि वीटग्रास (गेंहू के ज्वारे) पोषक तत्वों से भरपूर एक सुपरफूड है, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा है। वीटग्रास जूस पीना सबसे अच्छा रहता है। इसके औषधि के रूप में कई गुण हैं।