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मेरा गांव मेरी शान: आस्था और भाईचारे की अनूठी मिसाल है गांव दिनोद
भिवानी शहर से मात्र 10 किलोमीटर दूर गांव दिनोद की स्थापना करीब 740 साल पहले हुई थी। गांव में सभी जातियों का आपसी भाईचारा काफी मजबूत है। गांव के अधिकांश ग्रामीण कृषि पर निर्भर करते हैं। करीब 50 एकड़ भूमि के क्षेत्रफल में फैले इस गांव की ख्याति धर्म, संस्कृति और खेल की बदौलत देश-विदेश तक विख्यात है। गांव दिनोद में दो बड़े धार्मिक स्थल स्थापित हैं, जिनसे धर्म और आस्था की लौ पूरे प्रदेश और देश भर में मानव प्रजाति का मार्ग प्रशस्त कर रही है। राधा स्वामी संत ताराचंद महाराज के बाद संत कंवर महाराज इस धर्म संप्रदाय के गद्दीसीन परमसंत हैं। जबकि गांव में धूणीवाला बाबा का बड़ा मंदिर हैं, जिसके प्रति ग्रामीणों की गहरी आस्था बनी है।
गांव दिनोद में अनेक महान स्वतंत्रता सेनानियों व शूरवीरों ने जन्म लेकर मातृभूमि के लिए दुश्मनों से डटकर सामना किया है। गांव के छल्लूराम विक्टोरिया क्रॉस अवार्ड से सम्मानित हैं। आजाद हिंद फौज में गांव दिनोद के हरलाल, आशोदा, हरिराम, रामरत्न, धन सिंह का नाम भी हिंद के जांबाजों में आता है। गांव के बहादुर सैनिक रणबीर सिंह आतंकवादी मुठभेड़ में अपनी शहादत दे चुके हैं। वहीं गांव दिनोद दानवीरता में भी पीछे नहीं है। गांव के दानवीर सेठ रामगोपाल के वंशजों ने गांव का सरकारी स्कूल और अस्पताल भवन बनवाया है। जबकि दानवीर राव तुलाराम ने गांव के धुणीवाला बाबा मंदिर व दुलासर तालाब का निर्माण कराया है। वहीं आईपीस अधिकारी कृष्ण कुमार राव भी इसी माटी के लाल हैं। गांव की माटी में संस्कृति और संस्कार के साथ खेलों का जुनून भी जुड़ा है। गांव के अंतर राष्ट्रीय मुक्केबाज परमजीत समोता ने कॉमनवेल्थ मुक्केबाजी में स्वर्ण पदक जीता है। एशियाड 2010 खेलों में परमजीत समोता ने कांस्य पदक जीता। वहीं एशियन चैंपियनशिप 2009-10-11 में कांस्य पदक विजेता रहे हैं। गांव की बेटी कलावती आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी मुक्केबाजी में स्वर्ण पदक विजेता रह चुकी है। गांव की बेटी अरुणा ताईक्वांडों की अंतर राष्ट्रीय खिलाड़ी है। जिसने एशियन चैंपियनशिप में रजत और किम योंग अंतराष्ट्रीय कप मुकाबले में स्वर्ण पदक जीता है।
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