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The village of Tigdana derives its name from Susharma's Trigarta territory during the Mahabharata era.
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मेरा गांव, मेरी शान: महाभारत काल में सुशर्मा के त्रिगत ठिकाने से पड़ा गांव तिगड़ाना का नाम, 1355 ई में ठाकुर जग्गा सिंह ने जाटू लुहारी से आकर था बसाया
तिगड़ाना। गांव तिगड़ाना की स्थापना 1355 ई. में ठाकुर जग्गा सिंह ने की थी जो गांव जाटूलुहारी से चलकर यहां आए थे। 1355 में वे यहां आए तो सबसे पहले बालकनाथ बड़े संत तपस्यारत थे। ये महाभारत कालीन भूमि है। महाभारत काल के समय यहां बस्ती होती थी। महाभारत में यौद्धा सुशर्मा त्रिगत प्रदेश का राजा था। सुशर्मा ने यहां त्रिगत आत्मघाती दस्ते का ठिकाना बनाया था। उसे त्रिगत राज ठिकाना बोलते थे। महाभारत युद्ध के 13वें दिन जब गुरु द्रोण ने अभिमन्यु के लिए चक्रव्यूह रचा तो सुशर्मा को दायित्व दिया था कि युद्ध भूमि से अर्जुन को दूर ले जाना है। उनके पास त्रिगत राज संशप्तक यौद्धा होते थे, उन्होंने अर्जुन को चुनौति दी। इस जगह को त्रिगत ठिकाना बोलते थे। इसलिए इस गांव का नाम कालांतर में तिगड़ाना पड़ा। गांव तिगड़ाना सिंधु घाटी सभ्यता का पुरातात्विक स्थल है, जो हड़प्पाकालीन समय का एक बड़ा औद्योगिक केंद्र माना जाता था।
गांव तिगड़ाना करीब 2,850 परिवारों और करीब 20 हजार से अधिक आबादी का गांव हैं,। जिसमें हिंदू और राजपूत बाहुल्य समुदाय रहते हैं, जबकि सभी जातियों का आपसी भाईचारा भी यहां काफी मजबूत है। गांव में बाबा परमहंस लटाधारी तिगड़ाना बाबा की काफी मान्यता है, जिसके गांव में तीन मुख्य प्रसिद्ध मंदिर भी बने हैं। गांव में प्रवेश करते ही गुफा मंदिर है, जबकि गांव के बीचोंबीच बिचला मंदिर और अंतिम छौर पर बाबा का समाधि स्थल भव्य मंदिर बना हुआ है। तीनों ही भव्य और वास्तुकलां से सुसज्जित मंदिरों में श्रावण माह की पंचमी पर मेला लगता है। गांव तिगड़ाना वीर सैनिकों और शहीदों का गांव भी है। जिसमें काफी युवा भारतीय सेना में अपना अदम्य साहस दिखा देश की सीमाओं पर डटकर खड़े हैं।
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