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हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी संकट, हुड्डा-सैलजा-सुरजेवाला गुटों से संगठन कमजोर
Video Desk Amar Ujala Dot Com Published by: चंद्रप्रकाश नीरज Updated Tue, 20 Jan 2026 05:15 PM IST
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हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी अब केवल अंदरूनी मतभेद नहीं बल्कि संगठन की कार्यशैली को प्रभावित करने वाली स्थायी सच्चाई बन चुकी है। पार्टी नेतृत्व एक तरफ संगठन को मजबूत करने और अनुशासन का संदेश देने में जुटा है, दूसरी तरफ प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के अलग-अलग राजनीतिक एजेंडे इस कोशिश को कमजोर कर रहे हैं। कांग्रेस हाईकमान हरियाणा में संगठन से गुटबाजी दूर करने को लेकर लगातार प्रयास कर रहा है। वर्तमान में जिलाध्यक्षों को एकजुटता का पाठ पढ़ाया जा रहा है लेकिन गुटबाजी का रोग तब तक दूर नहीं होगा जब तक प्रदेश के शीर्ष स्तर के नेताओं में एकजुटता नहीं आती। प्रदेश कांग्रेस में सबसे प्रभावशाली धड़ा पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा गुट का माना जाता है। उनकी पकड़ संगठन, विधायक दल और चुनावी रणनीति में स्पष्ट दिखती है। इसके समानांतर सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा का गुट है जो खासतौर पर दलित समाज और कुछ क्षेत्रों में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए हुए है। तीसरा बड़ा खेमा राज्यसभा सदस्य रणदीप सिंह सुरजेवाला के इर्द-गिर्द माना जाता है। जिनकी राष्ट्रीय सक्रियता के बावजूद प्रदेश की राजनीति में अलग दखल बना हुआ है। इन तीनों गुटों के बीच तालमेल की कमी लंबे समय से कांग्रेस की कमजोरी बनी हुई है। इनके अलावा कुछ वरिष्ठ नेता ऐसे भी हैं जो औपचारिक रूप से किसी गुट का हिस्सा न दिखते हुए भी अपनी अलग राजनीति चला रहे हैं। पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव दक्षिण हरियाणा में अपनी स्वतंत्र पकड़ बनाए हुए हैं और संगठनात्मक फैसलों में अपने क्षेत्रीय प्रभाव को प्राथमिकता देते रहे हैं। वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह की राजनीति भी अलग राह पर चलती दिखाई देती है। उनका सामाजिक आधार और राजनीतिक दृष्टिकोण अक्सर प्रदेश नेतृत्व की मुख्यधारा से अलग नजर आता है। इससे कांग्रेस के भीतर एक और असंतुलन पैदा होता है।
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