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Jhajjar/Bahadurgarh News
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First wish fulfilled; now, on the second Kanwar pilgrimage, she has prayed for jobs for her siblings. Priya, a resident of Jaitpur village, has brought 51 liters of water from Haridwar for the second time.
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पहली मनोकामना हुई पूरी, अब दूसरी कावड़ में भाई-बहन के लिए मांगी नौकरी गांव जैतपुर निवासी प्रिया हरिद्वार से लगाकर दूसरी बार लेकर आई 51 लीटर जल
झज्जर। पिछले वर्ष हरिद्वार से लाई गई कावड़ में गांव जैतपुर निवासी प्रिया ने घर बनने की मन्नत मांगी थी। घर बनने की मनोकामना पूरी हुई तो प्रिया लगातार दूसरी बार कावड़ लेने के लिए हरिद्वार गई। इस बार प्रिया ने अपने लिए नहीं बल्कि अपने भाई-बहन के लिए नौकरी की मनोकामना मांगी है।
जिले के गांव जैतपुर निवासी प्रिया लगातार दूसरी बार हरिद्वार से कावड़ लेकर आई है। दोनों ही बार प्रिया 51 लीटर जल लेकर आई। कभी प्रिया ऊंची कूद की अच्छी खिलाड़ी हुआ करती थी, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थित अच्छी नहीं होने के चलते प्रिया ने बीच में ही खेल को छोड़ दिया। अब प्रिया कोचिंग सेंटर में पढ़ाई कर रही है। प्रिया की एक बहन और एक भाई है। प्रिया की बहन कीर्ति एमएससी की पढ़ाई कर रही है और उसका भाई बलजीत बीएससी की पढ़ाई कर रहा है। प्रिया का भाई पहले कुश्ती खेलता था, लेकिन आर्थिक स्थिति के कारण उसने भी खेल को बीच में ही छोड़ दिया। इन दोनों भाई-बहनों के लिए नौकरी की मन्नत मांगकर प्रिया इस बार कावड़ लेकर आई है। प्रिया के पिता राकेश कुमार स्कूल में बस चालक है, वहीं माता सुनीता गृहणी है।
प्रिया के टखने में परेशानी है। डॉक्टर ने प्रिया काे जूते पहनने की सलाह दी है। इसके बाद भी प्रिया हरिद्वार से कावड़ लेकर आई है। झज्जर में पहुंचते समय कई बार उसके पैरों में सूजन भी आ चुकी है। प्रिया प्रतिदिन 20 से 25 किलोमीटर चलती है। प्रिया जब गांव से कावड़ लेने के लिए हरिद्वार गई तो उसका वजन 53 किलो था। अब तक उसके वजन में भी बदलाव हो चुका है। जल के अलावा अन्य भार को मिलाकर प्रिया कुल 61 किलो वजन उठाकर जल रही है, जो उसके कुल वजन से भी ज्यादा है। हरिद्वार से कावड़ लेकर झज्जर पहुंची प्रिया ने बताया कि वह अकेली ही कावड़ लेने के लिए गई थी। वह अकेले की कावड़ लेकर चल रही है। रास्ते में अन्य शिव भक्तों का उनको साथ मिला है। कावड़ लेकर आते समय उनको किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हुई। पहली बार वह घर बनने की मन्नत मांगकर कावड़ लेकर आई थी। उसकी यह मनोकामना पूरी हो चुकी है। अब वह अपने भाई बहन के लिए नौकरी की मनोकामना के लिए कावड़ लेकर आई है। वह ऊंची कूद का खेल खेलती है, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजाेर होने के चलते उनको खेल को छोड़ना पड़ा। अब वह नौकरी की भी तैयारी कर रही है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में सुरक्षा के मद्देनजर कई जगहों पर पुलिस की तैनाती देखने को मिली, लेकिन हरियाणा में उनको बहुत ही कम स्थान पर पुलिस देखने को मिली है। झज्जर में भी सिर्फ एक ही जगह पर पुलिस देखने को मिली है।
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