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जींद: सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ 12 फरवरी को होगी हड़ताल
केंद्र ट्रेड यूनियनों, कर्मचारी संगठनों और संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर जाट धर्मशाला में महासम्मेलन हुआ। इसमें केंद्र और राज्य सरकार की मजदूर, कर्मचारी और किसान विरोधी नीतियों की आलोचना कर 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल करने का ऐलान किया गया।
महासम्मेलन की अध्यक्षता सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के राज्य प्रधान नरेश कुमार शास्त्री, इंटक के राज्य प्रधान अमित यादव और संयुक्त किसान मोर्चा के नेता एवं छज्जू राम कंडेला व ऑल हरियाणा पावर वर्कर यूनियन के राज्य प्रधान सुरेश राठी ने संयुक्त रूप से की। महासम्मेलन में सीटू के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदीप दत्ता ने कहा कि सरकार ने 29 श्रम कानूनों को खत्म कर चार लेबर कोड्स बनाकर मजदूरों के अस्तित्व को ही खत्म करने का प्रयास किया है। इसको वह लागू नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि मनरेगा को खत्म कर वीबी जी राम जी विधेयक पारित कर मजदूरों की रोजगार की गारंटी को खत्म कर दिया है। न्यूक्लियर एनर्जी कानून (शांति) विधेयक को आनन-फानन में में पारित कर नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डालकर इस क्षेत्र को निजी क्षेत्र को लाभ पहुंचाने के लिए खोल दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने बिजली वितरण प्रणाली को निजी हाथों में सौंपने के लिए भी बिजली अमेंडमेंट बिल का मसौदा जारी कर दिया है और इस बिल को बजट सत्र में पास कर दिया जाएगा। इससे बिजली गरीब व किसान की पहुंच से बाहर हो जाएगी और बिजली पर निजी क्षेत्र का कब्जा हो जाएगा। संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा कि सरकार आगामी सत्र में बीज विधेयक पारित कर किसानों के बीज को ही समाप्त करने पर आमादा है। उन्होंने कहा कि एसकेएम से जुड़े हजारों की संख्या में किसान बिजली अमेंडमेंट बिल, शांति को बीज विधेयक के खिलाफ 12 फरवरी को सड़कों पर उतरेंगे और राष्ट्रीय आम हड़ताल का समर्थन करेंगे। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के राज्य प्रधान नरेश कुमार शास्त्री ने कहा कि सरकार ठेका कर्मियों को रेगुलर करने, पुरानी पेंशन लागू करने, निजीकरण पर रोक लगाने, वेतन आयोग गठित करने,पांच हजार रुपये अंतरिम राहत देने और रिक्त पदों को भरने को लेकर गंभीर नहीं है। इसलिए सभी कर्मचारी संगठनों को साथ लेकर 12 फरवरी को हड़ताल करेंगे। ट्रेड यूनियन नेताओं ने कहा कि सरकार 26 हजार न्यूनतम वेतन लागू करने को लेकर गंभीर नहीं है। आंगनबाड़ी, आशा व मिड डे मील वर्करों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने और न्यूनतम वेतन तक देने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले 11 सालों से सरकार ने श्रम सम्मेलन का आयोजन तक नहीं किया जा। ट्रेन यूनियन और लोकतांत्रिक अधिकारों पर लगातार हमले तेज किए जा रहे हैं। इस अवसर पर सुदीप दत्ता, इंजीनियर विकास मलिक, सुभाष लांबा, जय भगवान व रमेश चंद्र, इंटक के महासचिव धर्मबीर लोहान, ऋषि नैन, सुमित दलाल, सतीश, जिला प्रधान संजीव ढांडा मौजूद रहे।
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