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मेरा गांव मेरी शान: 25 साल बाद भी सुविधाओं को तरस रही किलोई मंडी, खुले में पड़ा अनाज, चहारदीवारी तक नहीं
रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 03 May 2026 05:46 PM IST
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किलोई अनाज मंडी बदहाली की ऐसी है जहां 25 वर्षों से प्रशासनिक दावों के बावजूद मूलभूत सुविधाओं का टोटा है। इस मंडी में मात्र 2.5 एकड़ का सीमित पक्का क्षेत्र है, जबकि आवक इससे दस गुना से अधिक रहती है। इससे अनाज खुले में पड़ा रहता है और बारिश होने पर गेहूं खराब तक हो जाता है।
आढ़तियों व ग्रामिणों के अनुसार, वर्ष 1999 से चालू किलोई अनाज मंडी में आज भी हजारों क्विंटल गेहूं और अन्य अनाज 30 से अधिक एकड़ में खुले में पड़ा रहता है। मात्र मात्र 2.5 एकड़ क्षेत्र पक्का के बाद भी कच्चे फर्श या मिट्टी पर गेहूं पड़ा रहता है। बारिश और आंधी में अनाज भीग कर खराब होने की शत-प्रतिशत संभावना हैं। किसानों और आढ़तियों का कहना है कि सालों से मंडी में टीन-शेड की कमी है जिससे फसल खुले आसमान के नीचे रहती है।
चहारदीवारी न होने से आवारा पशु और चोरी का डर भी बना रहता है। बारिश के समय किसानों का अनाज भीग जाता है। इससे नमी के कारण उसका रंग फीका पड़ जाता है और सरकारी खरीद में दिक्कत आती है। हालात इतने बदतर हैं कि आढ़तियों के बैठने के लिए पक्के कमरे नहीं हैं। मंडी में रिकॉर्ड और बायोमेट्रिक मशीनें टेंट में रखी जा रही हैं। यह सुरक्षा के लिहाज से बेहद असुरक्षित है।
किलोई दोपाना के वार्ड-13 पंचायत मेंबर दीपक जांगड़ा ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को समय पर दवाई नहीं मिल रही हैं। अनेक दवाइयों केंद्र पर उपलब्ध ही नहीं है। वहीं, शहीद नफे सिंह राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय व राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (लड़कों के) में विद्यार्थियों के लिए पीने के पानी व्यवस्था नहीं है। कैंपरों के सहारे ही काम चलाया जा रहा है। दीपक ने बताया कि प्रशासन को गांव में पशुओं के लिए बने जाेहड़ों की चहारदीवारी करवानी चाहिए जिससे गंदा पानी जोहड़ में न जाए। इससे पानी भी साफ रहे और पशु भी बीमार न हों।
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