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रोहतक: किलोई गांव के थे डॉ. रामधन, वैज्ञानिक ने गेहूं की उन्नत किस्में तैयार कर दूर की थी अनाज की कमी
रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 29 Apr 2026 07:34 PM IST
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देश दुनिया को गेहूं की उन्नत किस्में देकर अनाज की किल्लत दूर की। गेेहूं की बेहतर व स्वस्थ बंपर पैदावार से हरि क्रांति के अग्रज बने। अपनी वैज्ञानिक सोच से अकाल को हरा 100 करोड़ लोगों को भूखे मरने से बचाया। हम बात कर रहे हैं डॉ. रामधन सिंह हुड्डा की। अमर उजाला ने इस महान वैज्ञानिक के जीवन के पहलू जानने के लिए गांव में इनके परिवार व ग्रामीणों से बातचीत की तो हर शख्स ने इन पर गर्व जताया। लोगों ने कहा कि हमें नाज है, हम डॉ. रामधन सिंह के गांव में जन्मे।
रोहतक से 20 किलोमीटर दूर कपिलेश्वर धाम के नजदीक स्थित किलोई गांव के साधारण किसान परिवार में 1 मई 1891 में जन्मे। अपनी मेहनत, लगन व नया करने की ललक से महान कृषि वैज्ञानिक बनें। लंदन कैम्ब्रिज विवि में पढ़ने गए। वर्ष 1925 में पीएचडी के बाद पंजाब कृषि महाविद्यालय एंड शोध संस्थान लायलपुर पंजाब (अब पाकिस्तान) में प्राचार्य रहे। यहां वर्ष 1947 में सेवानिवृत्ति तक रह कर गेहूं, जौ, धान, दाल, गन्ने की नई-नई किस्में इजाद की।
किसान के बेटे कृषि वैज्ञानिक डाॅ. रामधन सिंह 17 अप्रैल 1977 को इस संसार को अलविदा कह गए। उनकी दी गेहूं, गन्ना, बरसम व अन्य फसलों के उन्नत बीजों की बदौलत मिलने वाले बेशकीमती अनाज के रूप में वह अब भी जिंदा हैं। उनके बीज लोगों का पेट भरने के लिए अब भी अनाज मुहैया करा रहे हैं। गुणवत्ता में सर्वोत्तम गेंहू सी306, बासमती-370 किस्त ईजाद कर उन्होंने वर्ष 1925-45 में दुनिया को हरित क्रांति की राह दिखाई। वर्ष 1960 के दशक में अकाल के कारण दुनिया के 100 करोड़ लोग भूखे मरने से बचे।
राज्यपाल बनने से अच्छा वैज्ञानिक रह कर देश के लिए शोध करूं
वर्ष 1965 में लाल बहादुर शास्त्री ने डॉ. रामधन सिंह को किसी भी राज्य का राज्यपाल बनने के लिए कहा। इस पर उन्होंने कहा राज्यपाल बनने से अच्छा वैज्ञानिक रह कर देश के लिए शोध करूं। यह उनकी देशभक्ति व निस्वार्थ भाव सेवा था। वर्ष 1961 में पाकिस्तान ने उन्हें राष्ट्रपति गोल्ड मैडल से सम्मानित किया। वह यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय बने।
कैनेडा व मैक्सिकों ने भी अपनाया उनका गेहूं
कैनेडा व मैक्सिको ने सबसे पहले इनकी गेहूं सी-591 किस्म अपनाई व पैदावार के रिकॉर्ड बनाए। उनकी सी-217, सी-228, 250, 253, 273, 281 व सी-285, सी-518 मुख्य गेहूं की किस्में हैं। गेहूं की सबसे स्वादिष्ट सी-306 किस्म डॉ. रामधन सिंह ने इजाद की। संसार में मशहूर बासमती चावल 370 व झोना 349 भी उन्हीं की देन हैं।
नोबल विजेता ने छूए डॉ. रामधन के पैर
मेक्सिको के नोबल पुरस्कार विजेता डॉ. नॉर्मन ई बॉरलॉग 1963 में सोनीपत में उनके घर पर मिलने। यहां उनके पैर छू कर कहा - आपने संसार को बेहतर किस्में देकर 100 करोड़ लोगों को भूखे मरने से बचा लिया। कृषि वैज्ञानिक के प्रति यह उनका सम्मान था।
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