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Mandi After 52 years deities get a respectable place in the Paddal, a unique initiative by the administration on the demand of Dev Samaj
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Mandi: 52 वर्षों बाद देवी-देवताओं को पड्डल में मिला सम्मानजनक स्थान, देव समाज की मांग पर प्रशासन की अनुपम पहल
अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में 52 वर्षों बाद पड्डल मैदान में देवी-देवताओं के बैठने के लिए सम्मानजनक स्थान की व्यवस्था हो पाई है। देव समाज की मांग पर इस बार मंडी जिला प्रशासन ने एक अनुपम पहल करते हुए देवी-देवताओं के बैठने के लिए स्थाई व्यवस्था कर दी है। छोटी काशी मंडी का अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव। जो देव आस्था और विश्वास का एक अदभुत महाकुंभ है। पहले यह देव महाकुंभ मंडी शहर के विभिन्न स्थानों पर होता था लेकिन वर्ष 1973 के बाद इसे पड्डल मैदान में आयोजित किया जाने लगा। लेकिन पड्डल मैदान में कभी भी देवी-देवताओं के बैठने की स्थाई व्यवस्था नहीं हो पाई। देव समाज लंबे समय से इस मांग को उठा रहा था। लेकिन इस बार देव समाज की यह मांग जिला प्रशासन ने पूरी कर दी है। पड्डल मैदान के दायरे में बनी सीढ़ियों पर देवी-देवताओं के बैठने की स्थाई व्यवस्था कर दी गई है। सर्व देवता समिति के अध्यक्ष शिव पाल शर्मा ने बताया कि 52 वर्षों बाद यह स्थाई व्यवस्था हो पाई है और इस व्यवस्था को देव समाज के साथ कई बार मंत्रणा करने के बाद ही अंतिम स्वरूप दिया गया है। उन्होंने इसके लिए जिला प्रशासन का आभार भी जताया। बता दें कि इस बार देवी-देवताओं को पहली बार पगोडा शैली में बने अस्थाई तम्बूओं के नीचे बैठाया गया है। डीसी मंडी अपूर्व देवगन ने बताया कि देव दर्शनों के लिए एक देव भ्रमण श्रृंखला बनाई गई है जिसके माध्यम से लोग आसानी से अपने अराध्य देवी-देवताओं के दर्शन कर पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रशासन के पास देव समाज की यह मांग लंबे समय से थी और इस बार इसे देव समाज की अनुमति के बाद मूर्त रूप दे दिया गया है। वहीं, देव समाज से जुड़े लोग भी प्रशासन की इस व्यवस्था से खासे खुश नजर आ रहे हैं। देव माहूंनाग के पुजारी दीनानाथ और देवी वाया की गुशैण के गुर मान चंद ने बताया कि इस बार देवी-देवताओं को सम्मानजनक ढंग से बैठाने का प्रबंध किया गया है, जोकि प्रशंसनीय बात है। इससे देव समाज में खुशी का माहौल है। वहीं, श्रद्धालु भी इस नई व्यवस्था से खासे खुश नजर आ रहे हैं। श्रद्धालु दीपक शर्मा और कैप्टन कर्म सिंह ने बताया कि देवी-देवताओं के बैठने की जो व्यवस्था की गई है वो तो सराहनीय है ही लेकिन दर्शनों के लिए जो रास्ते का निर्माण किया गया है, उससे बड़ी आसानी से दर्शन हो पा रहे हैं। इन्होंने इसके लिए प्रशासन का आभार जताया। बता दें कि इस महोत्सव में मंडी जनपद के 216 पंजीकृत देवी-देवताओं को आमंत्रित किया जाता है जिसमें से 190 के करीब देवी-देवता हर बार इसमें शिरकत करने आते हैं। हर बार प्रशासन की तरफ से मेले में कुछ न कुछ नया करने का प्रयास किया जाता है, ताकि देव समाज और लोगों को बेहतरीन सुविधा दी जा सके।
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