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Workers Protest: मंडी में श्रमिक संगठनों का धरना, पुराने श्रम कानून बहाल करने और 42 हजार न्यूनतम वेतन की मांग
Ankesh Dogra
Updated Mon, 10 Aug 2026 02:19 PM IST
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पुराने श्रम कानूनों को बहाल करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर मंडी में श्रमिक और किसान संगठनों ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सीटू, हिमाचल किसान सभा और अन्य संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन कर अपनी मांगें उठाईं। प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा गया।
संगठनों ने मांग की कि केंद्र सरकार 29 पुराने श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में बदलने के बजाय पुराने श्रम कानूनों को दोबारा लागू करे। उनका कहना है कि श्रमिकों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पुराने प्रावधानों को बहाल करना जरूरी है।
सीटू के जिला सचिव राजेश कुमार शर्मा ने कहा कि सभी श्रमिकों के लिए 42 हजार रुपये प्रतिमाह का वैधानिक न्यूनतम वेतन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए मौजूदा मजदूरी में परिवारों का गुजारा करना मुश्किल हो रहा है।
संगठनों ने मनरेगा को मजबूत करने के साथ हर वर्ष कम से कम 200 दिनों के रोजगार की गारंटी देने और न्यूनतम मजदूरी 700 रुपये प्रतिदिन निर्धारित करने की मांग भी उठाई।
प्रदर्शनकारियों ने विद्युत निजीकरण विधेयक 2025 और बीज विधेयक 2025 को वापस लेने की मांग की। इसके अलावा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों को भी वापस लेने की मांग ज्ञापन में शामिल की गई।
किसान संगठनों ने जबरन भूमि अधिग्रहण और कॉरपोरेट समर्थित भूमि पूलिंग को रोकने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसानों के भूमि अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए।
संगठनों ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता के अधिकार से जुड़े कानून 2013, वन अधिकार अधिनियम 2006 और पंचायत अधिनियम 1996 के तहत मिले अधिकारों को कायम रखने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने बिजली उपभोक्ताओं पर स्मार्ट मीटर थोपे जाने का भी विरोध किया। उन्होंने स्मार्ट मीटर योजना वापस लेने और जबरन मीटर लगाने की प्रक्रिया बंद करने की मांग की।
इसके अलावा योजना कर्मियों को ग्रेच्युटी और पेंशन का लाभ देने की मांग भी उठाई गई।
किसान संगठनों ने सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने और सरकारी खरीद सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाने की मांग की।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते कर्ज के संकट को खत्म करने और किसानों व दिहाड़ी मजदूरों की आत्महत्याओं को रोकने के लिए व्यापक ऋण माफी लागू करने की मांग भी रखी।
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