समाजवादी पार्टी के नेता आज़म ख़ान कहते हैं, "ये सच है कि संस्थापक सदस्यों में सिर्फ़ मैं ही ज़िंदा हूँ. ये मेरी ज़िंदगी का तीसरा किस्सा है। पहले 1975 से 1977 तक का आपातकाल। फिर 27 महीने और फिर 23 महीने। ये 27 और 23 महीने इतने भारी हैं कि मुझे आपातकाल का कोई ज़ख्म या यादें याद नहीं आतीं। उस वक़्त इंसानियत ज़िंदा थी, लेकिन अब हैवानियत भी ज़िंदा नहीं है। यही फ़र्क़ है उस आपातकाल और इस अघोषित आपातकाल में। अब आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि ये मुक़दमे दर्ज कराने वालों और करने वालों का स्तर क्या है.मुझ पर चोरी का इल्ज़ाम लगा, लेकिन सज़ा डकैती की मिली
उन्होंने एक भावनात्मक बात कहते हुए यह भी ज़िक्र किया कि जब वह जेल में थे और उनकी पत्नी ईद पर अकेली बैठकर रो रही थीं, तब किसी ने उनके परिवार की खबर नहीं ली, किसी का फोन नहीं आया। इसलिए अब किसी और को आने की क्या जरूरत है। उन्होंने कहा, "ये सिर्फ़ दो लोगों की मुलाक़ात होगी। तीसरे के लिए कोई जगह नहीं है, चाहे वह कोई भी हो।"
उन्होंने अखिलेश यादव के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि अखिलेश उनके लिए उनकी औलाद जैसे अजीज हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश का उनके "तन-मन पर हक है" और उनके आने से उनका सम्मान बढ़ेगा। मुलाकात से पहले उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि वह 'अपराधी' हैं और उन पर कई मुकदमे चल रहे हैं, जिसमें 'मुर्गी चोरी' में 30 लाख का जुर्माना और लंबी सजा शामिल है। उन्होंने खुद को देश के सबसे बड़े 'भूमाफिया' के तौर पर भी बताया था।मुलाकात के बाद आजम खान ने कहा कि यह पूरी तरह से व्यक्तिगत और मानवीय मुलाकात थी, इसका कोई राजनीतिक अर्थ नहीं लगाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "मैं अभी-अभी जेल से लौटा हूं और अस्वस्थ हूं। वह सिर्फ मुझसे मिलने आए थे।"