क्या राष्ट्रपति ट्रंप के ‘टैरिफ इंजेक्शन’ ने भारत को चीन के साथ बैठने के लिए मजबूर किया? राजनयिक इस पर केवल मुस्कराते हैं। लेकिन उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के तियानजिन शहर से कुछ खास तोहफा लेकर दिल्ली लौट रहे हैं। भारत और चीन के बीच में चौड़ी हो चुकी खाई को ‘विश्वास बहाली’ के उपाय के साथ पाटने की कोशिश होगी। विदेश सचिव विक्रम मिस्री को भरोसा है कि एक महीने के अंदर दोनों देशों के बीच में सीधी उड़ान सेवा शुरू हो जाएगी। उनके इस दौरे से कई देशों के रिश्ते में मिठास आने के आसार है। इस दौरे के बाद विश्वास बहाली के उपायोंं पर खास जोर रहेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चीन से बेहतर कनेक्टिविटी का मंत्र दिया था। विक्रम मिस्री ने कहा कि अगले महीने भारतीय उड्डयन मंत्रालय की टीम चीन जाएगी। बात होगी और 5 साल बाद सीधी उड़ान सेवा आरंभ होने के आसार हैं। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी चार महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। भारत साफ कहा है कि चीन उसका प्रतिद्वंदी नहीं, बल्कि साझीदार है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में दोनों देशों की विशेषज्ञ आपसी बातचीत से तमाम मसलों का हल निकालेंगे। आपसी संबंध मजबूत होंगे। भारत के तीर्थ यात्री कैलाश मानसरोवर की यात्रा कर सकेंगे। सीमा पार नदियों को लेकर साझे हितों पर बात हो सकेगी। डेटा का साझा किया जा सकेगा। भारत और चीन व्यापार में नरमी का संकेत दिया है। इससे लग रहा है कि चीन भारत को विशेष यूरिया की आपूर्ति, रेअर अर्थ पर लगी रोक को शिथिल कर सकता है। नाथुला दर्रे से दोनों देशों के बीच में कारोबार शुरू करने रोड-मैप बन सकता है और व्यापार घाटे को तर्कसंगत बनाने में पहल हो सकती है।
भारत और चीन के बीच में खराब रिश्ते की असल जड़ गलवां घाटी में 2020 में हुई सैनिकों की खूनी झड़प है। चीन के सैनिकों ने अंतरराष्ट्रीय समझौता और सहमति को न मानते हुए वास्तविक नियंत्रण रेखा का अतिक्रमण किया था। गलवां, देपसांग, पेंगांग समेत तमाम क्षेत्र में घुसपैठ कर आए थे। सीमा विवाद के इस मुद्दे पर भारत और चीन दोनों देशों ने कोई संकेत नहीं दिया है। यहां एनएसए अजीत डोभाल और उनके चीन के समकक्ष वांग यी के बीच बनी सहमति के आधार पर दोनों देशों ने इस पर कोई बात नहीं की। समझा जा रहा है कि इससे बचते हुए विश्वास बहाली के उपाय पर खास जोर दिया गया। इसमें कूटनीतिक संवाद जारी रखने, दोनों देशों के बीच वार्ता के विभिन्न फोरम को सक्रिय करने, आदान-प्रादन, सहयोग लोगों की आवाजाही बढ़ाने, एक दूसरे की चिंताओं पर ध्यान देने, वैश्विक मंच पर एक दूसरे के हितों की रक्षा करने पर जोर देंगे। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने द्विपक्षीय वार्ता के बाद इस तरह उपायों पर खास सुझाव भी दिया।
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