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What did gangster Neeraj Bawana say, did the court also accept his point?
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क्या बोला गैंगस्टर नीरज बवाना की कोर्ट भी मान गया उसकी बात?
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Wed, 02 Jul 2025 11:04 AM IST
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दिल्ली की सड़कों पर मंगलवार को एक अलग ही दृश्य देखने को मिला। सायरनों की आवाज, आधुनिक हथियारों से लैस पुलिस कमांडो, और हर चौराहे पर चेकिंग… यह सब किसी वीआईपी मूवमेंट के लिए नहीं, बल्कि देश के कुख्यात गैंगस्टर नीरज बवाना की बीमार पत्नी से मिलने की इजाजत के बाद किया गया अभूतपूर्व सुरक्षा इंतज़ाम था।
दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के तहत नीरज बवाना को मंगलवार, 1 जुलाई को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक शादीपुर स्थित एक अस्पताल में भर्ती अपनी पत्नी आरती से मिलने की कस्टडी पैरोल मिली थी। लेकिन इस मुलाकात को लेकर दिल्ली पुलिस और खुफिया एजेंसियों में जबरदस्त सतर्कता रही। वजह साफ थी — यह वही नीरज बवाना है, जिसकी गैंग का दिल्ली-एनसीआर में व्यापक नेटवर्क है और जो पहले भी गैंगवार, जेल ब्रेक और हथियार तस्करी जैसे गंभीर मामलों में संलिप्त रहा है।
तिहाड़ जेल से लेकर शादीपुर अस्पताल तक बवाना की एक-एक हरकत पर नजर रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने स्पेशल सेल, SWAT यूनिट, जिला पुलिस, और खुफिया एजेंसियों की संयुक्त टीमें लगाई थीं। पूरा अस्पताल परिसर छावनी में तब्दील कर दिया गया था।
अस्पताल में भर्ती उसकी पत्नी के वार्ड को आम लोगों के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया। अस्पताल प्रशासन को भी पहले ही सतर्क कर दिया गया था। डॉक्टरों और नर्सों की सीमित टीम को ही बवाना की पत्नी के पास जाने की अनुमति दी गई।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “हमारे पास इनपुट्स थे कि बवाना के विरोधी गैंग इस दौरान हमला कर सकते हैं, या उसकी गैंग पुलिस पर हमला कर उसे छुड़ाने की कोशिश कर सकती है। इसी आशंका के चलते हमने पूरी दिल्ली को अलर्ट पर रखा।”
सूत्रों के मुताबिक, नीरज बवाना ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर छह सप्ताह की अंतरिम जमानत मांगी थी ताकि वह अपनी पत्नी की देखभाल कर सके, जो ICU में भर्ती है। लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने उसके आपराधिक इतिहास और सुरक्षा खतरों को ध्यान में रखते हुए सिर्फ 6 घंटे की कस्टडी पैरोल दी।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस दौरान नीरज बवाना केवल अपनी पत्नी और डॉक्टरों से मिल सकेगा। उसे किसी बाहरी व्यक्ति या गैंग के सदस्य से मिलने की अनुमति नहीं दी गई।
मंगलवार की सुबह जैसे ही तिहाड़ जेल से भारी सुरक्षा के बीच बवाना को बाहर निकाला गया, राजधानी में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं। बवाना के मूवमेंट से जुड़े हर ट्रैफिक सिग्नल पर पुलिस की मौजूदगी रही। CCTV से हर गतिविधि की निगरानी की जाती रही।
स्पेशल ब्रांच और दिल्ली पुलिस की तकनीकी टीमों ने अस्पताल और उसके आसपास की मोबाइल एक्टिविटी पर नजर रखी। बवाना को अस्पताल लाने वाले रास्ते पर किसी भी संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट मिलते ही अलर्ट जारी किया गया।
शायद यह पहली बार था जब जेल में बंद एक खतरनाक अपराधी को बेबस हालत में अपनी पत्नी के ICU बेड के पास देखा गया। यह वही नीरज बवाना है, जिसके नाम से ही गैंगवार की कहानियाँ NCR में सुनाई जाती हैं। लेकिन मंगलवार को वह एक असहाय पति की तरह डॉक्टरों से पत्नी की हालत पूछता नज़र आया।
कई पुलिसकर्मी बताते हैं कि अस्पताल में बवाना पूरी तरह शांत और भावनात्मक नजर आ रहा था। लेकिन दिल्ली पुलिस ने इस भावनात्मक पक्ष को किसी भी साजिश का हिस्सा बनने नहीं दिया और पूरी योजना को बेहद सतर्कता से अंजाम दिया।
नीरज बवाना फिलहाल तिहाड़ जेल में है लेकिन उसकी गैंग अभी भी सक्रिय है। कश्मीरी गेट, बाहरी दिल्ली, नरेला, और यूपी बॉर्डर तक उसकी पकड़ मानी जाती है। हाल ही में उसने कथित तौर पर जेल के अंदर से भी गैंग को निर्देश देने की कोशिश की थी।
यही कारण है कि दिल्ली पुलिस अब भी बवाना के कोर्ट आने-जाने, अस्पताल मुलाकातों या अन्य कानूनी राहतों के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है। पुलिस सूत्र बताते हैं कि भविष्य में यदि बवाना को फिर से किसी कारणवश जेल से बाहर लाना पड़ा, तो सुरक्षा में किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।
नीरज बवाना को मिली यह एक दिन की कस्टडी पैरोल, एक ओर जहां मानवता का पहलू उजागर करती है, वहीं कानून की कठोरता को भी दर्शाती है। अदालत ने साफ किया कि अपराधी चाहे कोई भी हो, अगर मामला व्यक्तिगत या मानवीय संवेदना से जुड़ा हो, तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। लेकिन साथ ही, ऐसे मामलों में कानून और सुरक्षा की सख्ती में कोई ढील नहीं दी जा सकती।
यह घटना न केवल न्याय व्यवस्था की संतुलित सोच को दिखाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि दिल्ली पुलिस और प्रशासन इस तरह की संवेदनशील परिस्थितियों को गंभीरता और सतर्कता से संभालने में पूरी तरह सक्षम हैं।
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