श्रावण के महीने में आगर मालवा स्थित बाबा बैजनाथ के दरबार में आने वाली कांवड़ यात्राएं भक्तों के साथ-साथ नगरवासियों के लिए भी खासा आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इन यात्राओं में कांवड़ के साथ देवी-देवताओं के अनेक स्वरूपों में झांकियां निकाली जा रही हैं। पूरे मार्ग में हर हर महादेव, बोल बम के जयघोष, डीजे, ताशे, बैंड-बाजे और आकर्षक झांकियों से माहौल भक्तिमय बना हुआ है।
शिवभक्तों की आस्था का अनुपम दृश्य उस समय देखने को मिला जब शिवशक्ति कांवड़ एवं कलश यात्रा संघ समिति द्वारा 11वीं वार्षिक कांवड़-कलश यात्रा धूमधाम से निकाली गई। यह धार्मिक पदयात्रा सुसनेर स्थित सिंचाई विभाग परिसर के श्री मनकामनेश्वर महादेव मंदिर से शुरू होकर पंचदेहरिया महादेव मंदिर तक पहुंची। यात्रा का शुभारंभ महा रुद्राभिषेक के साथ हुआ, जिसके बाद सैकड़ों श्रद्धालु कंधों पर कांवड़ और सिर पर कलश लेकर 10 किलोमीटर लंबी पदयात्रा पर निकले। पूरे मार्ग में हर हर महादेव, बोल बम के जयघोष, डीजे, ताशे, बैंड-बाजे और आकर्षक झांकियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस यात्रा में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। 8 से 10 साल के बच्चों द्वारा कांवड़ उठाकर पूरी पदयात्रा करना श्रद्धा और अनुशासन का अद्भुत उदाहरण बना। जगह-जगह लोग इन बच्चों की भक्ति की सराहना करते नजर आए।
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यात्रा में सामाजिक सौहार्द और एकता की भी झलक देखने को मिली। विभिन्न समाजों ने श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा और स्वल्पाहार से स्वागत किया। यात्रा में विशेष रूप से हाथी दरवाजे पर मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा पुष्पवर्षा कर शिवभक्तों का अभिनंदन किया गया, जो साम्प्रदायिक एकता का सुंदर संदेश था। पूरी यात्रा के दौरान पुलिस, राजस्व और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी सुरक्षा और सुविधाओं के लिए तैनात रहे। सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह जल सेवा, फल वितरण और प्राथमिक चिकित्सा देकर सहयोग दिया।
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वहीं, जय शिव कांवड़ यात्रा और हनुमान झंडा मंडल के संयुक्त तत्वावधान में एक अन्य कलश यात्रा सनातन चौक से शुरू होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए आगर स्थित अति प्राचीन मंदिर पहुंची। इस कलश यात्रा में महिलाओं और छोटी-छोटी बालिकाओं ने सिर पर कलश लेकर भारी बारिश के बीच भी सहभागिता निभाई। श्रावण मास में भक्ति का ऐसा रंग चढ़ा कि आसपास के क्षेत्रों में भी कलश यात्रा के साथ-साथ रामायण के अखंड पाठ और शिवपुराण की कथा का आयोजन किया जा रहा है। बरसते पानी के बावजूद आस्था का अद्भुत संगम और उत्साह देखने को मिला। श्रद्धालु बारिश के बावजूद नहीं रुके। महिलाओं ने मंगल गीतों के साथ भोलेनाथ के भजन गाते हुए पैदल 21 किलोमीटर की दूरी तय कर आगर स्थित बैजनाथ दरबार में पहुंचकर बाबा का जलाभिषेक किया।
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नगरवासियों द्वारा जगह-जगह पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का भव्य स्वागत किया गया। फल, खिचड़ी, केले आदि का वितरण हुआ। कलश यात्रा के समापन पर सभी श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 3000 महिला-पुरुषों ने बाबा के आंगन में प्रसादी ग्रहण की। कलश यात्रा की जानकारी देते हुए समिति के सदस्य डॉ. बाबू प्रजापत और भंवर सिंह राठौड़ ने बताया कि यह यात्रा का चौथा वर्ष था। भारी बारिश के बावजूद महिलाओं का उत्साह और समर्पण देखने लायक था। स्थानीय पुलिस प्रशासन की ओर से चाक-चौबंद व्यवस्था रही।
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