डिंडोरी जिले के अमरपुर विकासखंड अंतर्गत परसेल ग्राम पंचायत का पिंडरुखी गांव शनिवार को अचानक राजनीतिक हलचल का केंद्र बन गया। वजह बनी गांव की बदहाल सड़क और उससे उपजा वर्षों का गुस्सा। बीजेपी विधायक ओमप्रकाश धुर्वे जब गांव दौरे पर पहुंचे, तो उन्हें गांव में प्रवेश से पहले ही युवाओं के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा।
जानकारी के मुताबिक, विधायक का काफ़िला जैसे ही पिंडरुखी गांव के बाहर पहुंचा, पहले से आक्रोशित युवाओं ने उसे रोक लिया। युवाओं का कहना था कि वे वर्षों से सड़क की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। इस बार उन्होंने ठान लिया था कि जब तक बात सुनी नहीं जाएगी, चुप नहीं बैठेंगे। नतीजा यह रहा कि मौके पर जमकर नारेबाज़ी हुई और विधायक को खरी-खोटी सुनाई गई।
स्थिति यह रही कि विधायक ओमप्रकाश धुर्वे अपनी गाड़ी से बाहर नहीं उतरे। ग्रामीणों और युवाओं की नाराज़गी इतनी साफ थी कि सुरक्षा और माहौल को देखते हुए विधायक ने गांव में प्रवेश किए बिना ही वापस लौटना बेहतर समझा। गांव में कार्यक्रम और स्वागत की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन सब कुछ धरा का धरा रह गया।
पिंडरुखी गांव की सबसे बड़ी समस्या यहां की जर्जर सड़क है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात में सड़क की हालत और भी खराब हो जाती है। कीचड़, गड्ढे और पानी से भरी सड़क पर चलना मुश्किल हो जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर मरीजों और गर्भवती महिलाओं तक, सभी को परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार एंबुलेंस तक गांव में नहीं पहुंच पाती।
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युवाओं ने आरोप लगाया कि चुनाव के समय नेता गांव आते हैं, सड़क बनाने का वादा करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सब भूल जाते हैं। इस बार युवाओं ने साफ शब्दों में कहा कि अब वादों से काम नहीं चलेगा, उन्हें ज़मीन पर काम चाहिए।
घटना की खबर फैलते ही आसपास के गांवों में भी चर्चा तेज हो गई। कई ग्रामीणों ने युवाओं के विरोध को सही ठहराते हुए कहा कि अगर समय रहते समस्याओं का समाधान किया गया होता, तो ऐसी नौबत नहीं आती।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर विधायक या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन इतना साफ है कि पिंडरुखी गांव की बदहाल सड़क अब सिर्फ एक स्थानीय समस्या नहीं रही, बल्कि यह जनता के सब्र और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही का सवाल बन चुकी है। अब देखना यह होगा कि विरोध के बाद शासन और प्रशासन इस ओर कोई ठोस कदम उठाते हैं या नहीं।