डिंडोरी जिले में पिछले दो दिनों से हो रही लगातार बारिश के चलते नर्मदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। रविवार सुबह डिंडोरी शहर और जोगी टिकरिया के पास नर्मदा पर बने दोनों पुल जलमग्न हो गए। पुलों के ऊपर पानी आने के बाद पुलिस ने बैरिकेडिंग कर आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया। इसके चलते डिंडोरी का जबलपुर से सड़क संपर्क बाधित हो गया है। जोगी टिकरिया के पास जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाईवे पर बना नर्मदा पुल रविवार सुबह पानी में डूब गया। वहीं, डिंडोरी नगर के भीतर बना करीब 25 फीट ऊंचा नर्मदा पुल भी जलमग्न हो गया। बताया जा रहा है कि बारिश के दौरान पहली बार दोनों पुल एक साथ पानी में डूबे हैं।
स्थानीय लोग सुबह करीब 6 बजे से ही जोगी टिकरिया पुल के पास पहुंचकर नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए थे। पानी पुल के ऊपर आने के बाद लोगों ने बैरिकेड्स लगाकर रास्ता बंद कर दिया। दोनों पुलों के डूबने से डिंडोरी से जबलपुर की ओर सड़क मार्ग से आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। वहीं, नदी के निचले इलाकों में बैकवाटर का स्तर भी लगातार बढ़ रहा है।
पुलों पर पुलिस ने लगाए बैरिकेड
पुलों के जलमग्न होने की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। निरीक्षक दुर्गा प्रसाद नगपुरे ने मौके का जायजा लिया और बाढ़ की स्थिति की निगरानी की। सुरक्षा के मद्देनजर दोनों पुलों पर पुलिस बल तैनात किया गया है। नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद जोगी टिकरिया और मुख्य नर्मदा पुल के पास बैरिकेड और रस्सियां लगाकर आवागमन रोक दिया गया है। नदी किनारे बसे सात परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बने रैन बसेरे में शिफ्ट कराया गया है। वहीं, नर्मदा के दूसरे तट पर हंस नगर और साकेत नगर के नदी किनारे बने कुछ घरों में बैकवाटर पहुंचने की स्थिति बनी हुई है।
कलेक्टर-एसपी ने लिया बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया और एसपी आशीष खरे ने अधिकारियों के साथ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। कलेक्टर ने बताया कि लोगों को पहले ही अलर्ट किया जा चुका है। नदी किनारे पुलिस और राजस्व विभाग की टीमें तैनात हैं और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। कलेक्टर ने लोगों से अपील की है कि जलभराव वाले क्षेत्रों और नदी के आसपास जाने से बचें और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
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बाढ़ प्रभावित महिला ने कलेक्टर से मांगा आवास
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर जब नर्मदा किनारे वार्ड क्रमांक 7 पहुंचीं तो बाढ़ प्रभावित उर्मिला बाई ने उनसे आवास की मांग की। उर्मिला बाई ने बताया कि वह मजदूरी कर अपना जीवन-यापन करती हैं। पिछले साल अतिक्रमण की कार्रवाई में उनका घर टूट गया था, जिसके बाद से वह किराए के मकान में रह रही हैं। उन्होंने बताया कि आवास के लिए नगर परिषद में राशि भी जमा की है, लेकिन अभी तक उन्हें आवास नहीं मिला। मजबूरी में उन्हें दोबारा उसी स्थान पर रहना पड़ रहा है, जहां बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
निरीक्षण के दौरान एसडीएम राम बाबू देवांगन, एसडीओपी सतीश द्विवेदी सहित नगर पालिका का अमला मौजूद रहा। फिलहाल, प्रशासन और पुलिस की टीमें नदी के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और लोगों से नदी एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की जा रही है।