मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ (हाई कोर्ट) परिसर में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति स्थापित किए जाने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। बार एसोसिएशन ने मूर्ति स्थापित करने के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए लाल पट्टी बांधकर विरोध जताया। वहीं, अन्य वकीलों (एडवोकेट्स) ने इस विरोध को निंदनीय बताया और हाई कोर्ट बार का खुला विरोध करने की चेतावनी दी।
अब तक अपने शहर के चौक-चौराहों पर महापुरुषों और राजनेताओं की मूर्तियां स्थापित करने को लेकर विरोध प्रदर्शन देखे गए हैं, लेकिन प्रथम कानून मंत्री और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति ग्वालियर हाई कोर्ट परिसर में स्थापित होने से पहले ही हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। शनिवार को लाल पट्टी बांधकर मूर्ति निर्माण रोकने के लिए प्रदर्शन किया गया और मूर्ति निर्माण का कार्य अनुमति मिलने तक रुकवा दिया गया।
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हाई कोर्ट बार एसोसिएशन का विरोध
हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ग्वालियर के अध्यक्ष एडवोकेट पवन पाठक ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि चौक-चौराहों सहित सार्वजनिक स्थान से जुड़ी हुई जगह पर किसी भी महापुरुष की मूर्ति नहीं लगाई जाएगी। इसके बावजूद, ग्वालियर हाई कोर्ट परिसर में अंबेडकर जी की मूर्ति लगाने के लिए बिना अनुमति के फाउंडेशन स्ट्रक्चर तैयार कर दिया गया। बार एसोसिएशन ने बैठक कर प्रस्ताव पारित किया है कि हाई कोर्ट परिसर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए जात-पात से ऊपर उठकर कोई भी मूर्ति नहीं लगाई जानी चाहिए। क्योंकि, न्यायालय सर्वधर्म सद्भाव और जात-पात से ऊपर उठकर काम करता है, ऐसे में अंबेडकर मूर्ति निर्माण का बार एसोसिएशन खुलकर विरोध करता है।
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OBC, SC, ST वकीलों ने जताई आपत्ति
वहीं, अन्य वकीलों के साथ-साथ OBC, SC, ST समुदाय के वकीलों ने भी बार एसोसिएशन को चेतावनी देते हुए कहा है कि अंबेडकर जी की प्रतिमा स्थापित किए जाने का विरोध करना बहुत ही निंदनीय है। संविधान निर्माता और इस देश के प्रथम कानून मंत्री के रूप में बाबा साहब का देश में अहम योगदान है। हाई कोर्ट बार एसोसिएशन उसी महान व्यक्ति के विरोध में खड़ी हुई है। बाबा साहब के समर्थक एडवोकेट्स ने चेतावनी दी है कि वे हाई कोर्ट बार एसोसिएशन का खुला विरोध करेंगे।