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Jabalpur News: 11 वर्षीय छात्र को नौवीं में प्रवेश से जुड़े मामले में हाईकोर्ट के निर्देश, सरकार से मांगा जवाब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Wed, 08 Oct 2025 03:13 PM IST
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मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस डीडी बंसल की युगलपीठ ने केंद्र सरकार को प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को समायोजित करने की नीति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। एकलपीठ ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड सीबीएसई की तरफ से दायर की गई अपील की सुनवाई करते हुए उक्त आदेश जारी किए। अपील पर अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
सीबीएसई के चेयरमैन की तरफ से दायर अपील में जबलपुर निवासी 11 वर्षीय छात्र को कक्षा नौवीं में अस्थायी तौर प्रवेश दिए जाने के संबंध में एकलपीठ द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई थी। अपील में कहा गया था कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत विशेष कक्षाओं में प्रवेश के लिए आयु मानदंड निर्धारित किया गया है। युगलपीठ ने अपील की सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस दिन यह मामला सूचीबद्ध हुआ, उसके अगले दिन देश के एक सबसे युवा सर्जन की खबर आई। वह व्यक्ति 13 या 14 साल की उम्र में सर्जन कैसे बन गया। केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि इस संबंध में संबंधित विभाग से परामर्श मांगा गया है, जो अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है।
युगलपीठ ने पाया कि देश में इन प्रतिभाशाली बच्चों को पहले से ही मान्यता प्राप्त है, 12 साल की उम्र में छात्र आईआईटी की पढ़ाई कर रहा है। आईआईटी भारत में है, इस तरह के बच्चों को मान्यता दे रहे हैं। केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने इस संबंध में निर्देश प्राप्त करने के लिए एक सप्ताह का समय प्रदान करने का आग्रह किया। युगलपीठ के पूछने पर केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने बताया कि छात्र को वास्तव में कक्षा 9वीं में अस्थाई तौर पर प्रवेश दिया गया है। युगलपीठ ने कहा कि दुनियाभर के असाधारण छात्रों ने कम उम्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं और उन्हें केवल नीतिगत प्रतिबंधों के कारण नहीं रोका जाना चाहिए। अदालत ने केंद्र सरकार से ऐसे प्रतिभाशाली बच्चों को समायोजित करने की नीतियों के बारे में भी स्पष्टीकरण मांगा है। अपील पर अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
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