मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की धार्मिक तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में सोमवती अमावस्या के दौरान हुए एक दर्दनाक हादसे ने जिला प्रशासन के इंतजामों की कलई खोल कर रख दी है। दरअसल, यहां महाराष्ट्र के अमरावती से आए श्रद्धालु राहुल देशपांडे अचानक गहरे पानी में जाने के कारण डूबने लगे। उन्हें आसपास नाव चला रहे नाविकों ने देखते ही लाइफ जैकेट और अन्य बचाव साधनों की मदद से पानी से बाहर निकाल लिया।
गंभीर हालत में नर्मदा से बाहर निकाला
फेफड़ों में अधिक पानी जाने के कारण श्रद्धालु राहुल की हालत गंभीर हो गई। ऐसे में वहां मौजूद उनके परिजन उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए नर्मदा घाटों के आसपास एंबुलेंस तलाशने लगे। लेकिन परिजनों का आरोप है कि वहां कोई एंबुलेंस या तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं थी।
एंबुलेंस नहीं मिली तो चादर की झोली बनाकर दौड़े परिजन
परिजनों के अनुसार, घाट से ऑटो स्टैंड भी काफी दूरी पर था। ऐसे में उन्हें खुद अपने परिजन को बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने एक चादर की झोली बनाई और गंभीर हालत में राहुल को उसमें लिटाकर अस्पताल की ओर दौड़ पड़े।
चादर में मरीज को उठाकर ले जाते परिजन जब तीर्थ नगरी के बाजारों से होते हुए बस स्टैंड की ओर पहुंचे, तो हर कोई स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था पर सवाल उठाता नजर आया। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें राहुल के परिजन उन्हें झोली में ले जाते दिखाई दे रहे हैं।
ऑटो मिलने के बाद अस्पताल पहुंचे लेकिन नहीं बची जान
कुछ दूरी तय करने के बाद परिजनों को एक ऑटो मिला, जिसमें किसी तरह राहुल को अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने तत्काल इलाज शुरू किया और सीपीआर देकर उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन अस्पताल पहुंचने में हुई देरी के कारण राहुल को बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
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घाटों पर एंबुलेंस और चिकित्सा सुविधा की मांग तेज
घटना के बाद राहुल के परिजनों के साथ ही तीर्थ नगरी के स्थानीय लोगों में भी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि प्रमुख धार्मिक स्थल होने के बावजूद घाटों पर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। उनका मानना है कि यदि समय पर एंबुलेंस मिल जाती तो शायद राहुल की जान बचाई जा सकती थी।