लंबे इंतजार के बाद मानसून ने जिले में दस्तक दे दी है। करीब दो घंटे से अधिक समय तक हुई तेज बारिश ने मौसम का मिजाज बदल दिया। बारिश से जहां किसानों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई, वहीं वन ग्राम पीपलझोपा में जलभराव के कारण जनजीवन प्रभावित हो गया। बारिश के बाद लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली।
किसानों के लिए यह बारिश किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही है। क्षेत्र में अधिकांश किसानों ने कपास, मिर्च, मक्का सहित अन्य खरीफ फसलों की बुवाई कर दी है, जबकि कई किसान अभी भी बोवनी के कार्य में जुटे हुए हैं। ऐसे में समय पर हुई बारिश से फसलों को लाभ मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
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दूसरी ओर वन ग्राम पीपलझोपा में तेज बारिश के कारण मुख्य मार्गों पर जलभराव हो गया। गांव में पर्याप्त जल निकासी व्यवस्था नहीं होने से सड़कें तालाब जैसी नजर आने लगीं। कई स्थानों पर दो से तीन फीट तक पानी जमा हो गया, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
बारिश का असर साप्ताहिक हाट बाजार पर भी देखने को मिला। खराब मौसम के कारण लोगों की आवाजाही कम रही, जिससे व्यापार प्रभावित हुआ। भगवानपुरा, धुलकोट, सुखपरी, काबरी, अंबाखेड़ा, देजला, देवाड़ा और थरड़पुरा सहित कई गांवों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। किसानों का कहना है कि मानसून की शुरुआत अच्छी हुई है। यदि आगे भी इसी तरह बारिश जारी रही तो फसलों का उत्पादन बेहतर होने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि इस सीजन में बारिश नहीं होने से किसान चिंतित थे। कपास, मिर्च और मक्का सहित अन्य फसलें सूखने लगी थीं। कई किसान फसल बचाने के लिए टैंकरों से पानी मंगवाकर सिंचाई करने को मजबूर थे। वहीं कई गांवों में पेयजल संकट के हालात बनने लगे थे। शहर की पेयजल आपूर्ति के प्रमुख स्रोत कुंदा नदी के बैराज में भी सीमित पानी ही शेष बचा था। ऐसे में मानसून की पहली अच्छी बारिश ने किसानों के साथ-साथ आम नागरिकों को भी बड़ी राहत दी है।