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Khargone News: होली पर निभाई गई प्राचीन गाड़ा खिंचाई परंपरा, कसरावद और बामंदी में हजारों श्रद्धालु बने साक्षी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरगोन Published by: खरगोन ब्यूरो Updated Thu, 05 Mar 2026 04:19 PM IST
खरगोन जिले में होली पर्व के अवसर पर अलग-अलग स्थानों पर प्राचीन और आस्था से जुड़ी गाड़ा खिंचाई की परंपरा निभाई गई। कसरावद और बामंदी गांव में आयोजित इस अनोखे आयोजन को देखने के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचे और धार्मिक उत्साह के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए।
कसरावद नगर के भवानी माता चौक पर यादव मोहल्ले के श्रीराम यादव (बड़वा) द्वारा पारंपरिक गाड़ा खिंचाई की रस्म निभाई गई। बताया जाता है कि यह परंपरा धुलेंडी के दिन निभाई जाती है, लेकिन इस वर्ष चंद्रग्रहण के कारण इसे अगले दिन आयोजित किया गया। गोधूलि बेला में हुए इस आयोजन में श्रीराम यादव ने सात गाड़े खींचकर परंपरा का निर्वहन किया। गाड़ा खींचने से पहले उन्हें हल्दी लगाई गई और सारथियों के कंधों पर बैठाकर गाड़ा मैदान तक लाया गया। पूरे आयोजन को विवाह की रस्मों की तरह संपन्न किया गया, जिसे देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
जिले के बामंदी गांव में भी होली के दूसरे दिन बुधवार देर शाम गाड़ा खिंचाई की परंपरा निभाई गई। बाजार चौक में आयोजित इस आयोजन में करीब 5 हजार लोग शामिल हुए। यहां सूर्यास्त के समय गाड़ों की पूजा-अर्चना की गई और जयघोष के बीच ओझा को उनके सहायकों के कंधों पर बैठाकर मैदान तक लाया गया। श्रद्धालुओं ने खंडेराव बाबा के जयकारे लगाए। इस दौरान ओझा ने 9 लोहे के गाड़ों को लगभग 400 मीटर तक खींचा, जबकि इन गाड़ों पर करीब 500 श्रद्धालु नंगे पैर सवार थे। परंपरा के अनुसार बड़वा रामसिंह पटेल और खांडेराव महेश पटेल ने पूरे दिन उपवास रखकर इस धार्मिक रस्म को पूरा किया। आयोजन की शुरुआत भीलट बाबा मंदिर में पूजन से हुई। सूर्यास्त के समय बड़वा और खांडेराव बाबा ने मकड़ी घुमाकर परंपरा की शुरुआत की।
कई पीढ़ियों पुरानी परंपरा
ग्रामीणों के अनुसार हर साल 9 बैलगाड़ियों को जोड़कर गाड़ा बनाया जाता था, लेकिन इस वर्ष विशेष रूप से 9 नए लोहे के गाड़े तैयार कराए गए। गांव के बुजुर्ग भी इस परंपरा की शुरुआत के बारे में सटीक जानकारी नहीं दे पाते, लेकिन उनका कहना है कि यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है। पूरे आयोजन की व्यवस्था गांव के करीब 500 युवकों की टोली ने संभाली।
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