पन्ना टाइगर रिजर्व के प्रतिबंधित कोर जोन में स्थित आस्था और प्रकृति के अद्भुत संगम झालरिया महादेव के दर्शन गुरुवार, 29 जनवरी को वर्ष में एक बार श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। इस विशेष अवसर पर घने जंगलों, ऊँची-ऊँची चट्टानों और वन्यजीवों के बीच बसे दिव्य गुफा मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
हजारों की संख्या में भक्तों ने भगवान शिव के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। झालरिया महादेव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ स्थित शिवलिंग का प्राकृतिक जलधाराओं से निरंतर अभिषेक होता रहता है। हजारों फीट ऊँची चट्टानों के बीच से गिरती अमृत समान जलधारा श्रद्धालुओं को गहरी आध्यात्मिक अनुभूति से भर देती है।
कोर जोन में सिर्फ 6 घंटे के लिए मिली श्रद्धालुओं को अनुमति
चूंकि मंदिर पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर जोन में स्थित है, इसलिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। श्रद्धालुओं को केवल बड़ी गाड़ियों से ही प्रवेश की अनुमति दी गई और वह भी सीमित समय यानी मात्र 6 घंटे के लिए। पूरे क्षेत्र में पन्ना टाइगर रिजर्व प्रशासन द्वारा वन विभाग का विशेष निगरानी दल तैनात रहा। मंदिर के आसपास फैली रंग-बिरंगी चट्टानें और घनी हरियाली इस स्थान की प्राकृतिक सुंदरता को और भी बढ़ा देती हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां दर्शन मात्र से ही मन को अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है।
पढे़ं: बस स्टैंड क्षेत्र में पत्नी की हत्या करने वाले पति को आजीवन कारावास, 13 महीने बाद कोर्ट सुनाया फैसला
कोर जोन में दिखे वन्य प्राणी, यात्रा बनी रोमांचक
दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं को जंगल के राजा बाघ, हिरण, नीलगाय सहित अन्य वन्यजीवों के दीदार का भी अवसर मिला, जिससे यह यात्रा और अधिक रोमांचक बन गई। हर वर्ष की तरह इस बार भी दर्शन के दिन विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ दूर-दराज से आए भक्तों ने प्रशासन और वन विभाग की व्यवस्थाओं की सराहना की। उनका कहना था कि यह आयोजन आस्था, प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण का अनूठा उदाहरण है।