पन्ना जिले के दोहरे हत्याकांड में न्यायालय ने एक बड़ा और कड़ा संदेश दिया है। प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेन्द्र मेश्राम की अदालत ने अपने दो सगे भाइयों की निर्मम हत्या करने और मां को घायल करने वाले आरोपी चरन सिंह राजपूत और उसके पुत्र शुभम सिंह राजपूत को दोषसिद्ध पाते हुए फांसी (मृत्युदंड) की सजा सुनाई है।
फांसी के साथ भारी जुर्माना
न्यायालय ने इस प्रकरण को 'जघन्य और सनसनीखेज' की श्रेणी में रखते हुए आरोपियों को कड़ी सजा से दंडित किया है। धारा 302/34 (हत्या) के तहत पिता-पुत्र दोनों को मृत्युदंड (फांसी) एवं 50,000-50,000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया। वहीं धारा 307/34 (हत्या का प्रयास) में 10-10 वर्ष का कठोर कारावास एवं 25,000-25,000 रुपये अर्थदंड, आयुध अधिनियम के तहत 3 वर्ष का कठोर कारावास एवं ₹2000 जुर्माना तथा धारा 25 आयुध अधिनियम में 1 वर्ष का कठोर कारावास एवं ₹1000 जुर्माने की सजा सुनाई गई।
जन्मदिन की खुशियां मातम में बदलीं
सहायक लोक अभियोजन अधिकारी रोहित गुप्ता ने बताया कि यह हृदयविदारक घटना 27 मई 2023 की है। ग्राम गोल्डी मुड़िया (थाना देवेन्द्रनगर) में नरेन्द्र सिंह के पुत्र का जन्मदिन था। भूमि विवाद के चलते चरन सिंह और उसके परिवार को इस उत्सव में नहीं बुलाया गया था। इसी बात से आक्रोशित होकर रात करीब 10:45 बजे चरन सिंह अपने पुत्र शुभम के साथ वहां पहुंचा। जब घर के बाहर नरेन्द्र सिंह, उनका भाई महेन्द्र सिंह और उनके माता-पिता बैठे थे, तभी पिता-पुत्र ने पिस्टल से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस गोलीकांड में नरेन्द्र सिंह और महेन्द्र सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी मां फूलाबाई बीच-बचाव के दौरान हाथ में गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गईं।
जांच और चार्जशीट में पुलिस की मजबूत विवेचना
मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी शक्ति प्रकाश पांडेय ने सूक्ष्म विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। शासन की ओर से पैरवी सहायक निदेशक अभियोजन डॉ. ज्योति जैन के मार्गदर्शन में राम यादव वरिष्ठ सहायक जिला अभियोजन अधिकारी द्वारा की गई। इस केस में सबसे पुख्ता कड़ी आरोपियों के अपने माता-पिता और परिजनों की गवाही बनी, जिन्होंने सत्य का साथ देते हुए दोषियों के विरुद्ध बयान दिए। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल पिस्टल और अन्य भौतिक साक्ष्य भी बरामद किए थे।
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अपराध क्रूरता की पराकाष्ठा
न्यायालय ने अभियोजन के तर्कों और न्यायिक दृष्टांतों से सहमत होते हुए माना कि यह अपराध क्रूरता की पराकाष्ठा है। सगे भाइयों का खून बहाना और अपनी ही मां पर जानलेवा हमला करना समाज के लिए एक बड़ा कलंक है, जिसके लिए मृत्युदंड ही उचित न्याय है।