सतना शहर में गुरुवार देर रात नशे में धुत युवकों ने पुलिस टीम पर ही हमला बोल दिया। कोलगवां थाना क्षेत्र की हनुमान नगर नई बस्ती में महज शांति व्यवस्था बनाए रखने पहुंची पुलिस को जान बचाकर पीछे हटना पड़ा। घटना ने यह साफ कर दिया कि अपराधियों के मन से कानून का डर तेजी से खत्म होता जा रहा है। सतना में रात करीब 12 बजे पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि वार्ड नंबर-15 स्थित पानी की टंकी के पास कुछ युवक शराब के नशे में गाली-गलौज कर रहे हैं और इलाके में दहशत फैला रहे हैं। सूचना मिलते ही कोलगवां थाना से दो पुलिसकर्मी बाइक से मौके पर पहुंचे, लेकिन हालात पुलिस के काबू से बाहर हो गए।
समझाने गई पुलिस, भड़क गए आरोपी
पुलिस ने जब युवकों को समझाने की कोशिश की तो वे उल्टा पुलिस से ही बदसलूकी करने लगे। शोर-शराबा बढ़ता देख पुलिस ने अतिरिक्त बल बुलाया। पुलिस की मौजूदगी बढ़ते ही आरोपी युवक भागकर नई बस्ती की तंग गलियों में घुस गए।
बस्ती के भीतर घेराबंदी और हमला
पुलिस टीम जब पीछा करते हुए बस्ती के अंदर पहुंची तो वहां पहले से मौजूद करीब 12 नशेड़ियों ने एक एएसआई और चार आरक्षकों को चारों ओर से घेर लिया। कुछ ही पलों में हालात बेकाबू हो गए और आरोपियों ने अचानक पुलिस पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए।
जब पुलिस को भी पीछे हटना पड़ा
लगातार हो रही पत्थरबाजी से पुलिसकर्मियों में अफरा-तफरी मच गई। हालात इतने बिगड़ चुके थे कि पुलिस को अपनी जान बचाने के लिए पीछे हटना पड़ा। सौभाग्य से इस हमले में कोई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ, लेकिन इस घटना ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
वायरल वीडियो ने खोली पोल
घटना का लाइव वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि किस तरह नशे में धुत युवक बेखौफ होकर पुलिस पर पथराव कर रहे हैं। वीडियो ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और इलाके में फैले नशे के नेटवर्क को उजागर कर दिया है।
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दहशत में इलाका, कार्रवाई का भरोसा
घटना के बाद हनुमान नगर नई बस्ती और आसपास के इलाकों में तनाव का माहौल है। स्थानीय लोग सहमे हुए हैं और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कोलगवां थाना प्रभारी सुदीप सोनी ने बताया कि एएसआई उमेश पांडेय के नेतृत्व में गई टीम पर हमला किया गया। सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है और जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।
कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल
सवाल यह है कि जब पुलिस ही सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक खुद को कितना सुरक्षित महसूस करेंगे? सतना में हुई यह घटना प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि यदि नशे और असामाजिक तत्वों पर सख्ती नहीं हुई, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।