सावन मास के पहले सोमवार पर सीहोर में आस्था, श्रद्धा और शिवभक्ति का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। सुबह चार बजे से देर रात तक सीवन नदी तट से लेकर कुबेरेश्वरधाम तक श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही बनी रही। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे डेढ़ लाख से अधिक कांवड़ यात्रियों और शिवभक्तों ने सीवन नदी से पवित्र जल भरकर लगभग 11 किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए कुबेरेश्वरधाम पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। पूरे मार्ग पर हर-हर महादेव और श्री शिवाय नमस्तुभ्यं के जयघोष से वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया।
सुबह चार बजे से देर रात तक जारी रही कांवड़ यात्रा
सावन के पहले सोमवार की शुरुआत तड़के ही श्रद्धालुओं की भीड़ के साथ हो गई। सीवन नदी तट पर हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र जल भरकर कांवड़ यात्रा आरंभ की। बारिश और उमस के बावजूद शिवभक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था। महिलाएं, पुरुष, युवा, बच्चे और बुजुर्ग सभी भगवान शिव की भक्ति में लीन होकर नंगे पांव कुबेरेश्वरधाम की ओर बढ़ते रहे। देर रात तक श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी रहा।
सेवा पंडालों में मिला श्रद्धालुओं को भरपूर सहयोग
सीवन नदी से कुबेरेश्वरधाम तक पूरे मार्ग में अनेक सेवा पंडाल लगाए गए थे। स्थानीय समाजसेवियों, धार्मिक संस्थाओं और शिवभक्तों ने कांवड़ यात्रियों के लिए चाय, फलाहार, भोजन, पेयजल तथा विश्राम की नि:शुल्क व्यवस्था की। सेवादार पूरे दिन श्रद्धालुओं की सेवा में समर्पित भाव से जुटे रहे। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा और जयघोष के साथ स्वागत भी किया गया।
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देशभर से पहुंच रहे श्रद्धालु, बढ़ रही कुबेरेश्वरधाम की पहचान
कांवड़ यात्रा में शामिल होने के लिए मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सीहोर पहुंचे। लगातार बढ़ती भीड़ के कारण सीवन नदी तट और कुबेरेश्वरधाम के आसपास का क्षेत्र धार्मिक उत्सव में बदल गया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के आह्वान के बाद सीवन नदी से कुबेरेश्वरधाम तक की कांवड़ यात्रा राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही है और हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने दिया शिवभक्ति का संदेश
ऑनलाइन प्रसारित श्री कांवड़ शिव महापुराण कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं से भगवान शिव की नियमित आराधना का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को पूरे वर्ष भगवान शिव को एक लोटा जल अर्पित करना चाहिए, जबकि सावन मास में दो लोटा जल चढ़ाकर शिव आराधना करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से घर बैठे ऑनलाइन कथा श्रवण करने की भी अपील की।
प्रशासन और समिति ने संभाली व्यवस्थाओं की कमान
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि सावन के पहले सोमवार को डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु कुबेरेश्वरधाम पहुंचे। भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन एवं समिति द्वारा सुरक्षा, यातायात नियंत्रण, चिकित्सा सहायता, पेयजल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं। पूरे मार्ग पर स्वयंसेवक श्रद्धालुओं की सुविधा और मार्गदर्शन में लगातार सक्रिय रहे।
आस्था, सेवा और शिवभक्ति का बना अनुपम संगम
सावन के पहले सोमवार पर सीवन नदी से कुबेरेश्वरधाम तक का दृश्य शिवभक्ति की विराट तस्वीर प्रस्तुत करता रहा। एक ओर कांवड़ लेकर बढ़ते लाखों श्रद्धालु, दूसरी ओर सेवा में समर्पित स्वयंसेवक और हर-हर महादेव के गूंजते जयघोष ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। देर रात तक जारी रही यह कांवड़ यात्रा सीहोर को प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के प्रमुख शिवभक्ति केंद्रों में स्थापित करती नजर आई।

देशभर से पहुंच रहे श्रद्धालु
देशभर से पहुंच रहे श्रद्धालु