सीधी नगर पालिका परिषद में उस समय सियासी घमासान मच गया, जब अपने ही दल की नगर पालिका अध्यक्ष पर उपेक्षा, भेदभाव और प्रताड़ना के आरोप लगाते हुए वार्ड पार्षद नगर पालिका कार्यालय परिसर में अनशन पर बैठ गए। सोमवार को आयोजित पीआईसी (प्रेसिडेंट इन काउंसिल) की बैठक के दौरान असंतुष्ट पार्षदों ने अपने-अपने वार्डों की लगातार अनदेखी का मुद्दा उठाया, लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने पर बैठक का बहिष्कार कर दिया और धरने पर बैठ गए।
अनशन पर बैठे पार्षदों का आरोप है कि नगर पालिका अध्यक्ष काजल वर्मा द्वारा केवल चुनिंदा वार्डों में ही विकास कार्य कराए जा रहे हैं, जबकि अन्य वार्डों को जानबूझकर उपेक्षित रखा जा रहा है। पार्षदों का कहना है कि उनके वार्डों से जुड़े प्रस्ताव न तो एजेंडे में शामिल किए जाते हैं और न ही बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस कार्रवाई होती है। पार्षदों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि या तो सभी वार्डों में समान रूप से विकास कार्य किए जाएं, या फिर अध्यक्ष नैतिकता के आधार पर अपने पद से इस्तीफा दें।
इस अनशन में तीन कांग्रेस पार्षदों के साथ एक निर्दलीय पार्षद हल्के सोनी भी शामिल रहे। उल्लेखनीय है कि सीधी नगर पालिका परिषद में कुल 24 वार्ड हैं, जिनमें से 18 वार्डों में कांग्रेस के पार्षद निर्वाचित हैं। इसके बावजूद कांग्रेस के ही पार्षदों का इस तरह खुला विरोध परिषद के भीतर गहरी आंतरिक कलह की ओर इशारा करता है।
वार्ड क्रमांक 17 की पार्षद सोनम सोनी ने कहा कि वह कांग्रेस की पार्षद होने के बावजूद खुद को “अनाथ” महसूस कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके वार्ड की सड़कों को खोदकर बर्बाद कर दिया गया, लेकिन न तो अध्यक्ष और न ही सीएमओ ने इस पर कोई कार्रवाई की। बार-बार शिकायत के बावजूद जब उनकी बात नहीं सुनी गई, तो उन्हें धरने का रास्ता अपनाना पड़ा।
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वहीं वार्ड क्रमांक 13 की पार्षद कुमुदिनी सिंह ने आरोप लगाया कि जी-हुजूरी न करने की सजा उन्हें और उनके वार्ड को भुगतनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि नालियों सहित कई मूलभूत समस्याएं वर्षों से जस की तस बनी हुई हैं। साथ ही नगर पालिका में कर्मचारियों के डाटा और भुगतान प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए।
दूसरी ओर नगर पालिका अध्यक्ष काजल वर्मा ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नगर पालिका के सभी वार्डों में समान रूप से विकास कार्य कराए जा रहे हैं और परिषद के निर्णय आपसी सहमति से लिए जाते हैं। फिलहाल पार्षद अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जिससे नगर पालिका की सियासत और अधिक गरमा गई है।