टीकमगढ़ जिले की हैदरपुर पंचायत में सरपंची के ठेके पर संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह मामला तब सामने आया, जब एक सड़क हादसे में सरपंच के बेटे की मौत के बाद यह उजागर हुआ कि सरपंच और उनके पति लंबे समय से गांव में नहीं, बल्कि दिल्ली में रह रहे थे। हालांकि जिम्मेदारों द्वारा मामले को दबाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अलग-अलग बयानों से पूरे प्रकरण में गड़बड़झाले की बू साफ महसूस की जा रही है।
गुरुवार शाम बड़ागांव के पास हुए सड़क हादसे में 18 वर्षीय अक्षय वंशकार और उसके साथी 14 वर्षीय अलिखेश अहिरवार की मौत हो गई थी। मृतक अक्षय की मां रामकुंवर हैदरपुर पंचायत की निर्वाचित सरपंच हैं। हादसे के बाद जब यह जानकारी सामने आई कि अक्षय के माता-पिता गांव में मौजूद नहीं थे, तब पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया। बताया गया कि परिवार के भरण-पोषण के लिए सरपंच और उनके पति पप्पू दिल्ली में मजदूरी करने गए हुए थे।
घटना के समय दोनों दिल्ली में थे। सूचना मिलने पर वे गुरुवार शाम वहां से निकले और शुक्रवार सुबह टीकमगढ़ पहुंचे। इस बीच सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई कि पंचायत की सरपंच स्वयं गांव छोड़कर बाहर मजदूरी कर रही हैं, जबकि पंचायत का संचालन किसी और के भरोसे है। इसके बाद जिम्मेदारों के बयान बदलते नजर आए।
सरपंच पति पप्पू ने पहले मजदूरी की बात से इनकार करते हुए कहा कि वे साले के पास घूमने दिल्ली गए थे।
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वहीं, पंचायत सचिव मुलायम चढ़ार का कहना है कि सरपंच गांव में ही रहती हैं और कभी-कभी पप्पू बाहर जाते हैं। दो माह से दिल्ली में रहने की बात पर उन्होंने सफाई दी कि वे फरीदाबाद अपने पिता और बीमार भाई के पास गए थे। दूसरी ओर, सरपंच की भतीजी ने स्पष्ट कहा कि चाचा-चाची पिछले दो माह से दिल्ली में मजदूरी कर रहे थे। इस मामले पर जनपद पंचायत के सीईओ मनीष सेंडे ने कहा कि उन्हें प्रकरण की जानकारी नहीं है और वे इसकी जांच करवाएंगे। विरोधाभासी बयानों के चलते अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर पंचायत का वास्तविक संचालन कौन कर रहा है और क्या नियमों का उल्लंघन हो रहा है।