बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन एक बार फिर भारतीय संस्कृति, कला और अटूट श्रद्धा के महोत्सव की साक्षी बनी। मकर संक्रांति पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया और इसके बाद श्री महाकाल महालोक में पांच दिवसीय श्री महाकाल महोत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी, प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, सांसद अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ महाराज, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम अध्यक्ष श्रीमती कलावती यादव सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
श्री महाकाल महालोक और त्रिवेणी संग्रहालय परिसर में कला, संगीत और वैचारिक विमर्श का अनूठा संगम देखने को मिला। महोत्सव के प्रथम दिन सुप्रसिद्ध पार्श्वगायक शंकर महादेवन ने अपने पुत्रों सिद्धार्थ और शिवम के साथ ‘शिवोऽहम’ की संगीतमय प्रस्तुति दी। इससे पहले शंकर महादेवन और उनके पुत्रों ने श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर भगवान महाकाल के दर्शन किए। मंदिर प्रबंध समिति की ओर से उप प्रशासक श्रीमती सिम्मी यादव ने उनका स्वागत एवं सम्मान किया।
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में सपत्नीक पूजा-अर्चना की। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर उन्होंने धर्मपत्नी सीमा यादव के साथ विशेष पूजन कर प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।
आगे इन तिथियों पर होंगे विशेष आयोजन
15 जनवरी: मुंबई का प्रसिद्ध द ग्रेट इंडियन क्वायर ‘शिवा’ थीम पर प्रस्तुति देगा।
16 जनवरी: लोकप्रिय गायिका सोना महापात्रा अपनी संगीत यात्रा प्रस्तुत करेंगी।
17 जनवरी: इंदौर के श्रेयस शुक्ला और मुंबई के विपिन अनेजा व बैंड की सुगम संगीत प्रस्तुति।
18 जनवरी: महोत्सव का समापन इंडोनेशिया (कोकोरदा पुत्रा) और श्रीलंका (अरियारन्ने कालूराच्ची) के दलों की ‘शिव केंद्रित नृत्य-नाटिका’ के साथ होगा, जो महोत्सव के अंतरराष्ट्रीय आयाम को दर्शाएगा।
महोत्सव के दौरान प्रतिदिन शाम 4 से 6 बजे तक त्रिवेणी संग्रहालय में मध्यप्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति का प्रदर्शन होगा। इसमें छिंदवाड़ा का भड़म, बैतूल का ठाट्या, धार का भगोरिया और सागर का बरेदी जैसे पारंपरिक नृत्य शामिल रहेंगे। प्रतिदिन कला यात्रा भी निकलेगी, जो शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई श्री महाकाल लोक पहुंचेगी। इसमें शिव बारात, डमरू वादन और मलखंब के प्रदर्शन मुख्य आकर्षण रहेंगे।
15 जनवरी को प्रातः 10:30 बजे ‘शिव तत्त्व और महाकाल: पुरातिहास, साहित्य और संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में’ विषय पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित होगी, जिसमें विद्वान शिव तत्व की दार्शनिक गहराइयों पर विमर्श करेंगे। आमजन को इस भक्तिमय आयोजन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।
अभ्युदय मध्यप्रदेश के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से कला यात्रा का आयोजन भी किया जाएगा। इसमें शिव बारात (भाव शैली) कृष्णा वर्मा एवं साथी, उज्जैन द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी। कला यात्रा बुधवार दोपहर 4 बजे देवास गेट बस स्टैंड से प्रारंभ होकर मालीपुरा, फव्वारा चौक, इंदौर गेट होते हुए श्री महाकाल लोक तक पहुंचेगी।