महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में हिंदू नववर्ष के शुभ अवसर पर 19 मार्च से विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाएगा। चैत्र मास के आगमन के साथ गर्मी की शुरुआत होती है, इसलिए गुड़ी पड़वा पर भगवान महाकाल को निरोगी रखने के लिए नीम का जल अर्पित किया जाएगा। इसके बाद पुजारी कोटितीर्थ कुंड पर सूर्य को अर्घ्य देंगे और मंदिर के शिखर पर नया ध्वज चढ़ाया जाएगा।
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का महत्व
मंदिर के पुजारी अर्पित गुरु ने बताया कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सृष्टि के आरंभ का पवित्र दिन माना जाता है। इस दिन से नए वर्ष की शुरुआत होती है। मान्यता है कि तीनों लोकों के स्वामी भगवान महाकाल के आंगन से ही हर पर्व और उत्सव की शुरुआत होती है। गुड़ी पड़वा के अवसर पर भगवान महाकाल को नीम और मिश्री से बना शरबत अर्पित किया जाएगा। इसके बाद यह प्रसादी श्रद्धालुओं में बांटी जाएगी। सुबह 7.30 बजे बालभोग आरती के बाद महाकाल मंदिर के शिखर पर नया ध्वज फहराया जाएगा। वहीं, नैवेद्य कक्ष में गुड़ी आरोहण कर पूजा-अर्चना की जाएगी। सुबह 10.30 बजे भोग आरती में भगवान को केसरिया श्रीखंड और पूरनपोली का भोग लगाया जाएगा।
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विशेष पूजन के पीछे का संदेश
चैत्र मास ऋतु परिवर्तन का समय होता है और इस दौरान वात, कफ, पित्त की वृद्धि के कारण कई रोग उत्पन्न होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार नीम और मिश्री का सेवन रोग निवारक माना जाता है। नीम के जल से स्नान करने से त्वचा संबंधी रोग समाप्त होते हैं। इसलिए महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की परंपरा में नीम के जल से भगवान महाकाल का स्नान कराना और भक्तों को प्रसाद वितरित करना निरोगी जीवन और समय के महत्व का संदेश देता है। मंदिर की पूजा परंपरा और तीज-त्योहार ग्वालियर के पंचांग अनुसार मनाए जाते हैं। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नए पंचांग की शुरुआत होती है और इस दिन विशेष पूजा से न केवल आध्यात्मिक संदेश मिलता है, बल्कि स्वास्थ्य और आयुर्वेदिक ज्ञान का भी प्रचार होता है।