अपनी राजनीति चमकाने और सरकार पर दबाव डालने के लिए कोई भी मां शिप्रा के जल को अशुद्ध और अपवित्र बताता है, लेकिन ऐसे लोग यह नहीं जानते कि इससे मां शिप्रा में आस्था रखने वाले करोड़ों धर्मावलंबियों की आस्था को आखिर किस प्रकार ठेस पहुंचती है। पुजारी महासंघ ने इसी भ्रांति को दूर करने के लिए आज रामघाट मां शिप्रा के तट पर न सिर्फ मां शिप्रा का पूजन अर्चन किया, बल्कि इस जल का आचमन कर यह संदेश भी दिया कि मां शिप्रा का जल पवित्र है। इसका आचमन करने से मन के विकार व स्नान करने से दूषित पुंज दूर होते हैं। जिसका उल्लेख शास्त्रों में भी है। यह बात पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित महेश शर्मा ने मीडिया से कही।
शिप्रा तट पर पुजारी महासंघ द्वारा रविवार सुबह पूजा अर्चना किए जाने के साथ ही यह संदेश दिया गया कि हमारे सभी तीर्थ पावन और पवित्र हैं। कुछ लोग पवित्र स्थलों को बदनाम करने का काम कर रहे हैं और वह क्षिप्रा, प्रयाग, हरिद्वार की गंगा, नासिक की गोदावरी नदी की शुद्धता और पवित्रता पर प्रश्न चिन्ह लगाते हैं। जो अशोभनीय है और सनातन धर्म की पवित्र नदियों का अपमान हैं। यह अपमान सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सिंहस्थ के दौरान शिप्रा के 29 किलोमीटर के क्षेत्र में घाटों का पक्का निर्माण किया जा रहा है। सिंहस्थ में सभी अखाड़ों को अलग-अलग घाटों पर स्नान करवाना चाहिए जिससे कि इस उत्सव की भव्यता और दिव्यता बढ़ जाए।
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पहले किया पूजन फिर किया घाटों का निरीक्षण
सनातन धर्मावलंबियों को क्षिप्रा नदी के पौराणिक महत्व और पवित्रता को बताने के लिए अखिल भारतीय पुजारी महासंघ द्वारा आज सुबह मां क्षिप्रा का दुग्धधारा से भव्य अभिषेक पूजन किया गया। इस पूजन पश्चात क्षिप्रा के पवित्र जल का आचमन किया गया। पूजा महाआरती के पश्चात कर्कराज घाट, भूखी माता घाट, गुरुद्वारा घाट, दत्त अखाड़ा घाट के बाद चक्रतीर्थ तक भ्रमण किया गया। पुजारी महासंघ ने घाटों का निरीक्षण कर ऐसे अव्यवस्थाओ को निकाला जिसे सरकार को अवगत करवाया जाएगा। जिस पर ध्यान देने से सिंहस्थ में भक्तो को सुविधा प्राप्त हो सकेगी।
13 अखाड़ों का अलग-अलग 13 स्थानों पर हो स्नान
पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित महेश शर्मा ने बताया कि सिंहस्थ में ऐसी कार्ययोजना बनाई जाए जिससे सरकार की मंशा अनुरूप सिंहस्थ दिव्य और भव्य रूप से निर्विघ्न संपन्न हो सके। इन दिनों मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 29 किलोमीटर के जो घाट स्थापित किए जा रहे हैं, वहां सिंहस्थ महापर्व को देखते हुए सभी 13 अखाड़ों को अलग-अलग 13 स्थानों पर स्नान की व्यवस्था हो, जैसे शैव दल के अखाड़ों को दत्त अखाड़ा क्षेत्र से लेकर त्रिवेणी तक के घाटों पर और रामादल दल के अखाड़ों को मंगलनाथ क्षेत्र के घाटों पर स्नान की व्यवस्था की जाए, जिससे भीड़ नियंत्रण में सरकार को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होगी, रामघाट पर केवल शंकराचार्य जी के स्नान की व्यवस्था की जाए।
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वैभव से नहीं श्रद्धा के साथ हो शाही स्नान
सिंहस्थ महापर्व के दौरान साधु संत शाही स्नान करते हैं, लेकिन उस समय वह अपने वैभव का प्रदर्शन जोर शोर से करते हैं। शाही स्नान का अर्थ अपने श्रद्धा भाव और लक्ष्य के साथ इस प्रकार से स्नान करना कि सनातन धर्म को इससे कोई संदेश मिल सके लेकिन इस प्रकार के वैभव को दिखाने से सनातन व्यवस्था को कुठाराघात पहुंचता है। साधु संतों से यही निवेदन है कि वह शांति के साथ स्नान करें।