मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के पुराने बस स्टैंड में सोमवार को कांग्रेस द्वारा किसान, मजदूर और आदिवासी अधिकार महासम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। सम्मेलन के जरिए कांग्रेस ने प्रदेश सरकार की नीतियों को लेकर किसानों, मजदूरों और आदिवासी वर्ग के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। हालांकि कार्यक्रम के दौरान पंडाल में कई कुर्सियां खाली नजर आईं, जिसकी चर्चा पूरे आयोजन के दौरान होती रही।
कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं ने मंच से प्रदेश सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों, मजदूरों और आदिवासी समाज की समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है। नेताओं का कहना था कि सरकार की कई नीतियां इन वर्गों के हित में नहीं हैं, जिससे ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सम्मेलन में पहुंचे नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने अपने संबोधन में आदिवासी समाज के अधिकारों और किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आदिवासी और किसान वर्ग कई समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन उनकी आवाज को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से किसानों, मजदूरों और आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए आवाज उठाती रही है और आगे भी संघर्ष जारी रहेगा। उनके संबोधन के दौरान मंच पर जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।
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कार्यक्रम में खाली कुर्सियों की भी रही चर्चा
महासम्मेलन के दौरान पंडाल में कई कुर्सियां खाली दिखाई दीं। आयोजन स्थल पर अपेक्षित भीड़ नहीं पहुंचने से यह बात चर्चा का विषय बन गई। स्थानीय स्तर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लोगों को कार्यक्रम में लाने की कोशिश जरूर की, लेकिन इसके बावजूद पंडाल पूरी तरह नहीं भर सका।
राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल मुद्दे पर भी दी प्रतिक्रिया
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जब पत्रकारों ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से बातचीत की, तो उन्होंने कई राजनीतिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी। पत्रकारों ने हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रोटोकॉल से जुड़े कथित विवाद को लेकर सवाल किया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उमंग सिंघार ने कहा कि आदिवासी समाज का सम्मान केवल किसी को बड़े पद पर बैठाने से नहीं होता, बल्कि उसके प्रति सोच और व्यवहार से भी दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर आदिवासी समाज का सम्मान करना है तो सिर्फ राष्ट्रपति बनाना ही काफी नहीं है। सबसे पहले आरएसएस को अपने संगठन का प्रमुख आदिवासी समाज से बनाना चाहिए। तभी असली सम्मान दिखाई देगा।
सियासत में चर्चा का विषय बना महासम्मेलन
उमरिया में आयोजित इस महासम्मेलन के जरिए कांग्रेस ने आदिवासी और किसान मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। हालांकि कार्यक्रम में खाली कुर्सियों की चर्चा भी खूब रही। वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बयानों के बाद प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस शुरू होती नजर आ रही है।