अजमेर दरगाह से जुड़े मामले में रोक लगाने की मांग को लेकर दायर की गई हस्ताक्षर याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान माननीय मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता इस मामले में पक्षकार नहीं है, इसलिए उसकी इंटरवेंशन एप्लीकेशन मेंटेनेबल नहीं है और उसे पार्टी भी नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को आवेदन वापस लेने का विकल्प दिया, जिस पर याचिकाकर्ता ने अपनी एप्लीकेशन वापस ले ली।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यह मामला वर्शिप एक्ट (Places of Worship Act) के दायरे में नहीं आता, इसलिए जिला अदालत में इस केस की सुनवाई जारी रहेगी। यह याचिका कर्नाटक के एक मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति द्वारा दायर की गई थी।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने कहा कि अजमेर दरगाह से जुड़े मामले में सत्य सामने आने से रोकने के लिए लगातार विभिन्न प्रकार की बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन सत्य को दबाया नहीं जा सकता।
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विष्णु गुप्ता ने कहा कि अजमेर दरगाह भगवान शिव का मंदिर है। यह ऐतिहासिक सच्चाई दुनिया के सामने न आ सके, इसके लिए अलग-अलग स्तर पर रुकावटें खड़ी करने की कोशिश की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट का यह स्पष्ट करना कि यह मामला वरशिप एक्ट के अंतर्गत नहीं आता, न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने आगे कहा कि जिला अदालत में निष्पक्ष और तथ्यात्मक सुनवाई से पूरे देश के सामने वास्तविकता उजागर होगी। हिंदू सेना इस मामले में कानूनी लड़ाई लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से जारी रखेगी।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद अब सभी की निगाहें जिला अदालत की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस मामले से जुड़े ऐतिहासिक और कानूनी तथ्यों की विस्तार से जांच की जाएगी।