राजस्थान सरकार ने नए जिलों का तो निर्माण कर दिया, लेकिन कई जिलों में मूलभूत सुविधाओं के अभाव के चलते लोग अलवर जिले में पहुंच रहे हैं। बात की जाए अलवर के सामान्य चिकित्सालय की तो यहां सोमवार और गुरुवार को दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाए जाते हैं। सोमवार और गुरुवार को सबसे अधिक लोगों की भीड़ ऑनलाइन प्रमाण पत्र के लिए लगती है। इन दिव्यांग लोगों के साथ दो परिजन साथ में होते हैं, जिसके चलते करीब 300 लोगों की भीड़ यहां देखी जाती है।
दूसरी ओर बहरोड़ और खैरथल जिले में इस तरह की सुविधा नहीं होने के चलते वहां के दिव्यांग भी अलवर के सामान्य चिकित्सालय में प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आ रहे हैं। 40 लोगों का टोकन एक दिन में कटता है। इन दोनों जिलों के लोग भी शामिल हो जाते हैं, जिसके चलते स्थानीय लोगों को बैरंग गांव लौटना पड़ता है। एक ग्रामीण ने बताया कि वह लक्ष्मणगढ़ से सुबह जल्दी आ गया था। अपने परिजन के साथ प्रमाण पत्र के लिए कतार में लगा हुआ था, लेकिन 40 टोकन काटने के बाद उन्हें मना कर दिया गया। ऐसे में लौटना पड़ रहा है। इससे पूर्व भी दो बार वह आ चुका है, लेकिन अभी तक प्रमाण पत्र नहीं बना जिससे इसको भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उधर दिव्यांग प्रमाण पत्र के एचओडी डॉ. विष्णु गुप्ता ने बताया कि जब राजस्थान सरकार ने अन्य जिले बना दिए हैं तो वहां पर यह सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए, जबकि वहां के लोग सामान्य चिकित्सालय पहुंच रहे हैं। इसके चलते जो पात्र लोग यहां के हैं उनका भी काम नहीं हो पा रहा है। सोमवार और गुरुवार को यह शिविर लगाया जाता है, लेकिन ऑनलाइन के चलते 2 दिन अतिरिक्त उन्हें काम करना पड़ रहा है। इसको लेकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग अधिकारी को शिकायत करने की बात कही गई है।