केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलने, महात्मा गांधी का नाम हटाने और योजना में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर कांग्रेस ने विरोध तेज कर दिया है। इसी क्रम में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर 10 जनवरी से प्रदेशव्यापी जन आंदोलन की शुरुआत की गई है। इसके तहत बांसवाड़ा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उपवास रखकर भाजपा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
कांग्रेस कार्यालय से कार्यकर्ता रैली के रूप में अंबेडकर सर्किल पहुंचे, जहां उन्होंने उपवास रखते हुए धरना दिया। इसके बाद शाम को पार्टी कार्यालय में प्रेस वार्ता आयोजित की गई।
कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार ने कहा कि वर्ष 2005 में यूपीए सरकार के कार्यकाल में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम लागू किया गया था, जिसके तहत हर वर्ष 5 से 6 करोड़ परिवारों को रोजगार मिला। इस योजना का नाम देश की आज़ादी में अहम भूमिका निभाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर रखा गया था, लेकिन भाजपा सरकार ने इसमें से महात्मा गांधी का नाम हटा दिया, जो पूरे देश का अपमान है।
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प्रदेश कांग्रेस द्वारा नियुक्त प्रभारी लालसिंह झाला ने कहा कि वर्तमान समय में मनरेगा के तहत मजदूरों को जरूरत के अनुसार काम नहीं मिल पा रहा है और मजदूरी का भुगतान भी बकाया है। इससे मजबूर होकर गरीब मजदूरों को दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नया अधिनियम काम की वैधानिक गारंटी को समाप्त करता है और निर्णय प्रक्रिया का केंद्रीकरण केंद्र सरकार के हाथों में कर देता है, जिससे ग्राम सभा और पंचायतें कमजोर होती हैं। साथ ही केंद्र सरकार का मजदूरी अंशदान लगभग 90 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे राज्य सरकारों और श्रमिकों पर वित्तीय बोझ बढ़ गया है।
लालसिंह झाला ने आगे कहा कि सीमित बजट आवंटन, कृषि मौसम के दौरान कार्य पर प्रतिबंध और मजदूरी सुरक्षा प्रावधानों के कमजोर होने से रोजगार में कमी आएगी, मजदूरों का दमन बढ़ेगा और ग्रामीण संकट गहराएगा। महात्मा गांधी का नाम हटाना ग्राम स्वराज के मूल्यों को कमजोर करता है। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने “मनरेगा बचाव संग्राम” जन आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है, ताकि काम के अधिकार की रक्षा की जा सके और मनरेगा को उसके मूल अधिकार आधारित स्वरूप में बहाल किया जा सके।
इस दौरान पीसीसी सचिव दिनेश श्रीमाली, कृष्णपाल सिंह सिसोदिया, इमरान खान पठान, केशवचंद्र निनामा, धर्मेंद्र तेली, नवाब फौजदार, देवबाला राठौड़, प्रज्ञा, शाश्वत गरासिया, सुभाष निनामा और शामदाद खान सहित कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।