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26.44% children dropped school in last five years in Barmer and Jaisalmer MP Beniwal raised issue in Loksabha
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बाड़मेर और जैसलमेर में 5 वर्षों में 26.44% बच्चों ने छोड़ी पढ़ाई, सांसद बेनीवाल ने लोकसभा में उठाया मुद्दा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर Published by: बाड़मेर ब्यूरो Updated Tue, 03 Feb 2026 07:14 PM IST
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बाड़मेर-जैसलमेर के सांसद उम्मेद राम बेनीवाल ने लोकसभा में तारांकित प्रश्न के उत्तर में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रेगिस्तानी और सीमावर्ती जिलों में बच्चों का बड़े पैमाने पर स्कूल छोड़ना शिक्षा की कड़वी जमीनी हकीकत को उजागर कर रहा है।
बाड़मेर और जैसलमेर में हालत गंभीर
सांसद ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में प्राथमिक से माध्यमिक स्तर तक कुल 26.44 प्रतिशत बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी है। बाड़मेर जिले में ड्रॉपआउट दर 21.34 प्रतिशत रही, जिसमें प्राथमिक स्तर पर 2.76 प्रतिशत, उच्च प्राथमिक पर 6.42 प्रतिशत और माध्यमिक स्तर पर 12.16 प्रतिशत बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं। वहीं, जैसलमेर जिले में स्थिति और गंभीर है, जहां कुल ड्रॉपआउट दर 30.94 प्रतिशत दर्ज की गई है। इसमें प्राथमिक स्तर पर 6.14 प्रतिशत, उच्च प्राथमिक पर 9.46 प्रतिशत और माध्यमिक स्तर पर 15.34 प्रतिशत बच्चे शिक्षा से बाहर हो चुके हैं। सांसद ने कहा कि जैसे-जैसे कक्षाएं ऊंची होती हैं, ड्रॉपआउट दर तेजी से बढ़ती है और माध्यमिक के बाद 50 प्रतिशत से अधिक बच्चे पूरी तरह शिक्षा व्यवस्था से बाहर हो जाते हैं।
'योजनाएं कागजों तक क्यों सीमित'
सांसद बेनीवाल ने सरकार द्वारा ड्रॉपआउट के कारणों के रूप में गरीबी, स्वास्थ्य समस्याओं और घरेलू कामकाज को बताने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल किया कि यदि गरीबी मुख्य कारण है तो छात्रवृत्ति, पोषण, परिवहन और आवासीय विद्यालयों की प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं दिखाई दे रही है। यदि स्वास्थ्य समस्याएं हैं तो स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम और पोषण योजनाएं कागजों तक ही क्यों सीमित हैं। और यदि बच्चे घरेलू श्रम में लगे हैं, तो बाल संरक्षण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ किसे मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ये सभी मुद्दे सरकार की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी हैं और नीतिगत विफलताओं को बच्चों और अभिभावकों के सिर नहीं मढ़ा जा सकता।
'बच्चों को स्कूल छोड़ने पर मजबूर किया जा रहा'
सांसद ने क्षेत्र में बुनियादी ढांचे और शिक्षकों की भारी कमी पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लगभग 70 प्रतिशत शिक्षक पद रिक्त हैं, करीब 50 प्रतिशत स्कूलों में भवन, कक्षाएं, शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। कई स्कूलों में एक शिक्षक पर कई कक्षाएं लगाई जा रही हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता, नियमित अध्यापन और निगरानी पूरी तरह प्रभावित हो रही है। सांसद ने कहा, 'बच्चे स्कूल नहीं छोड़ रहे, बल्कि सिस्टम उन्हें छोड़ने पर मजबूर कर रहा है।'
विकसित भारत 2047 पर किया कटाक्ष
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) और समग्र शिक्षा अभियान की जमीनी विफलता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि सीमावर्ती और पिछड़े इलाकों में हालात बद से बदतर क्यों हो रहे हैं, उच्च माध्यमिक और उच्च शिक्षा के ड्रॉपआउट आंकड़े क्यों छुपाए जा रहे हैं और रेगिस्तानी व सीमावर्ती जिलों के लिए अलग क्षेत्र-विशेष शिक्षा नीति कब बनेगी। सांसद बेनीवाल ने 'विकसित भारत 2047' के सपने पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आर्थिक तंगी से शिक्षा अधूरी रह जाती है, और गरीब तबके के लिए उच्च शिक्षा और बेहतर भविष्य सिर्फ नारे बनकर रह जाते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन आंकड़ों को गंभीरता से नहीं लिया, तो बाड़मेर, बालोतरा और जैसलमेर जैसे जिले शिक्षा के नक्शे पर हमेशा हाशिए पर रह जाएंगे।
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