चितलवाना तहसील क्षेत्र में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं और पुलिस की कथित निष्क्रियता के विरोध में ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। चोरों की गिरफ्तारी और प्रभावी पुलिस कार्रवाई की मांग को लेकर शुरू किया गया आंदोलन अब तेज हो गया है। हड़ताल के तीसरे दिन और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के दूसरे दिन भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस सकारात्मक पहल नहीं होने से प्रदर्शनकारियों में रोष और गहरा गया है। इस बीच गुरुवार को जिला कलेक्टर जालोर के नाम उपखंड अधिकारी चितलवाना के माध्यम से अनुस्मारक (रिमाइंडर) ज्ञापन सौंपा गया।
ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि चितलवाना तहसील के चारणीम, केरिया, रतौड़ा सहित आसपास के गांवों में बीते काफी समय से अज्ञात चोर रात्रि के समय घरों और मंदिरों को निशाना बनाकर लाखों रुपये की चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। इन सभी घटनाओं को लेकर पुलिस थाना चितलवाना में अलग-अलग प्रकरण दर्ज हैं, लेकिन अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इससे ग्रामीणों में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
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ग्रामीणों का कहना है कि 12 जनवरी 2026 को इस समस्या को लेकर उपखंड अधिकारी चितलवाना को ज्ञापन सौंपा गया था। उस समय थाना अधिकारी चितलवाना ने चोरों को पकड़ने और आवश्यक कार्रवाई के लिए 10 दिन का समय लेते हुए आश्वासन दिया था, लेकिन निर्धारित अवधि बीत जाने के बावजूद पुलिस प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसके चलते चोर बेखौफ होकर रोजाना अलग-अलग गांवों में चोरी की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।
अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठें
इसी के विरोध में 28 जनवरी 2026 से चारणीम गांव के नरसीराम प्रजापत, नागजीराम कोली, केसाराम भील, प्रेमाराम मेघवाल और रायचंदराम रावणा राजपूत उपखंड कार्यालय चितलवाना के सामने शांतिपूर्ण तरीके से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। गुरुवार 29 जनवरी को भूख हड़ताल के दूसरे दिन रतौड़ा और चारणीम गांव के ईश्वरलाल पुरोहित, हकमाराम प्रजापत, परखाराम देवासी, कृष्णराम भील और हरचंदराम कोली भी समर्थन में भूख हड़ताल में शामिल हो गए।
ग्रामीणों ने प्रशासन को अवगत कराया कि लगातार उपवास के कारण भूख हड़ताल पर बैठे लोगों के स्वास्थ्य में गिरावट आनी शुरू हो गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया और कोई अप्रिय घटना या स्वास्थ्य संबंधी नुकसान होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन से जनहित और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए चोरी की घटनाओं का शीघ्र खुलासा करने, आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने और क्षेत्र में प्रभावी पुलिस कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।