राजस्थान के इतिहास की शान मारवाड़ नस्ल के घोड़े यहां आज भी जिंदा हैं। महाराणा प्रताप का चेतक, जालौर जिले की शान बढ़ा रहे मारवाड़ी घोड़े, पांच लाख से करोड़ों तक की कीमत के हैं। मारवाड़ी नस्ल के घोड़ों को पालने वाले महंत अमृतनाथजी ने अमर उजाला को बताया कि मारवाड़ी नस्ल के घोड़ों की खूबसूरती और उनका शारीरिक ढांचा अन्य नस्लों जैसे काठियावाड़ी, नुगरा, अरबी और सिंधी घोड़ों से कहीं बेहतर होता है। इन घोड़ों की ऊंचाई, मजबूत पैर और लहराते कान इन्हें अलग पहचान देते हैं। यही कारण है कि इनकी कीमत पांच लाख से लेकर करोड़ों रुपये तक होती है।
राजस्थान का जालोर जिला, जो अपनी ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है। यह जिला आज भी मारवाड़ी घोड़ों की शान को संजोए हुए है। यह नस्ल न केवल अपनी सुंदरता और ताकत के लिए जानी जाती है, बल्कि इसकी ऐतिहासिक महत्ता भी इसे खास बनाती है। मारवाड़ी नस्ल के घोड़ों को पालने वाले निम्बावास के अमृतनाथ जी महाराज ने बताया कि मारवाड़ी नस्ल के घोड़ों की खूबसूरती और उनका शारीरिक ढांचा अन्य नस्लों जैसे काठियावाड़ी, नुगरा, अरबी और सिंधी घोड़ों से कहीं बेहतर होता है। इन घोड़ों की ऊंचाई, मजबूत पैर और लहराते कान इन्हें अलग पहचान देते हैं। यही कारण है कि इनकी कीमत पांच हजार रुपये से लेकर पांच करोड़ रुपये तक होती है।
इन्हें मुख्यतः सवारी, खेल और शाही परंपराओं के लिए पाला जाता है। उन्होंने बताया कि उनके मठ में उनके पास 18 घोड़े हैं। जालौर मारवाड़ के अलावा पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली सहित विश्व भर में इन घोड़े की अलग ही पहचान है और जालौर जिले के नाम को शौर्य के साथ जोड़ते हैं।
अपनी स्वामी भक्ति के लिए भी पहचाना जाता है ये घोड़ा
इतिहास गवाह है कि महाराणा प्रताप का प्रिय घोड़ा ‘चेतक’ मारवाड़ी नस्ल का ही था। हल्दीघाटी के युद्ध में चेतक ने अपनी अंतिम सांस तक महाराणा प्रताप का साथ निभाया। चेतक की वीरता और वफादारी आज भी इतिहास में अमर है। देश-विदेश के इतिहासकार जब भी महाराणा प्रताप के शौर्य का वर्णन करते हैं, चेतक का जिक्र जरूर होता है। वहीं, जालौर के वीर वीरमदेव भी इसी नस्ल के घोड़े की सवारी करते थे। मारवाड़ी घोड़ों को उनकी स्वामी भक्ति के लिए भी पहचाना जाता है। ये बहादुर और उत्साही घोड़े अपने मालिक से गहरे जुड़े रहते हैं। कई घुड़सवारी प्रेमियों का कहना है कि मारवाड़ी घोड़े दोस्ताना स्वभाव के होते हैं और जल्दी सीखने की क्षमता रखते हैं।
अश्व पालक और अश्व प्रेमी भोम सिंह ने बताया कि राजस्थान में अधिकतर आलीशान लाइन तूफान लाइन पैलेस लाइन मनी लाइन रत्नाकर लाइन मारवाड़ी नस्ल के घोड़े शामिल हैं। उन्होंने बताया कि मारवाड़ के नल के घोड़े ने राजस्थान के अलावा पंजाब महाराष्ट्र हरियाणा दिल्ली तमिलनाडु सहित देश भर में काफी नाम कमाया है। मारवाड़ी घोड़े को विदेशी लोग भी पसंद करते हैं। अच्छी दौड़ प्रतियोगिताओं के दौरान भी जालौर के घोड़े ने अच्छा प्रदर्शन किया है, जिसमें प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली प्रतियोगिता में मारवाड़ी घोड़े ने अपनी शान को मजबूत रखा है।