आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मुद्दे पर जनसमर्थन जुटा रहे पूर्व राजस्थान पर्यटन विकास निगम अध्यक्ष धर्मेन्द्र सिंह राठौड़ ने शुक्रवार को कोटपूतली में केंद्र सरकार की EWS आरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजस्थान सरकार की तर्ज पर केंद्र सरकार को भी अनावश्यक शर्तों को समाप्त करना चाहिए और पूरे देश में राजस्थान मॉडल लागू किया जाना चाहिए।
जन जागृति मंच के माध्यम से चलाए जा रहे अभियान के तहत कोटपूतली पहुंचे राठौड़ ने कहा कि वे अब तक राजस्थान के करीब 20 जिलों की यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि EWS वर्ग को आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग माना जाए या अनारक्षित वर्ग, इस संबंध में स्पष्टता आवश्यक है क्योंकि इससे जुड़े कई मुद्दे आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले 30-40 वर्षों से देश के विभिन्न हिस्सों में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण देने की मांग उठती रही है, ताकि उन्हें समाज की मुख्यधारा और बराबरी के स्तर पर लाया जा सके। राठौड़ ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में मेजर जनरल एस.आर. आयोग का गठन किया गया था, जिसने वर्ष 2010 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने की सिफारिश की थी और आय का आधार भी निर्धारित किया था।
ये भी पढ़ें: Kotputli-Behror News: हाईवे पर पलटा दूध से भरा टैंकर, लूटने के लिए बाल्टी, बोतल और ड्रम लेकर पहुंचे लोग
राठौड़ ने कहा कि उस समय केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार नहीं होने के कारण संविधान संशोधन संभव नहीं हो पाया। बाद में वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद वर्ष 2019 में 103वें संविधान संशोधन के जरिए EWS वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया, जिसका देशभर में स्वागत किया गया। उन्होंने इसे ऐतिहासिक और बड़ा निर्णय बताया। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि इसके साथ लागू की गई पांच शर्तों में कई प्रावधान न्यायसंगत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आठ लाख रुपये से कम वार्षिक आय की सीमा उचित है लेकिन पांच एकड़ से कम कृषि भूमि की शर्त राजस्थान जैसे राज्य के लिए व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि राजस्थान का बड़ा भूभाग मरुस्थलीय है। बाड़मेर, जालौर, बीकानेर और जोधपुर जैसे जिलों में पांच एकड़ जमीन से पर्याप्त आय अर्जित करना संभव नहीं है, वहीं पंजाब और हरियाणा की पांच एकड़ भूमि की उत्पादकता राजस्थान की तुलना में कहीं अधिक है। ऐसे में पूरे देश के लिए एक समान भूमि सीमा लागू करना उचित नहीं कहा जा सकता।
राठौड़ ने गांवों में रहने वाले EWS परिवारों के लिए 200 वर्ग मीटर से कम आवासीय परिसर की शर्त पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से बड़े आवासीय परिसर होते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि संबंधित परिवार आर्थिक रूप से समृद्ध है। इसलिए इस शर्त को भी समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार ने अपने स्तर पर जिन शर्तों को हटाया है, उसी प्रकार केंद्र सरकार को भी अपनी नौकरियों और योजनाओं में इन शर्तों को समाप्त करना चाहिए। उनका कहना था कि राजस्थान मॉडल को पूरे देश में लागू करना समय की आवश्यकता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को वास्तविक लाभ मिल सके।
राठौड़ ने पंचायत राज चुनावों में भी EWS वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब सरकार ने आठ लाख रुपये वार्षिक आय को आर्थिक कमजोरी का आधार मान लिया है, तो अन्य चार अतिरिक्त शर्तों को बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। उन्होंने केंद्र सरकार से राजस्थान सरकार के नियमों का अध्ययन कर कम से कम तीन वर्षों तक उसी मॉडल को लागू करने की मांग की। उनका कहना था कि इससे EWS वर्ग के लोगों को अधिक न्यायपूर्ण और प्रभावी तरीके से आरक्षण का लाभ मिल सकेगा और सामाजिक समानता को भी मजबूती मिलेगी।