राजस्थान के नागौर जिले की रियाबड़ी तहसील अंतर्गत थांवला गांव में पदस्थ पटवारी भागीरथ चौधरी को लेकर किसानों में भारी रोष है। किसानों ने पटवारी पर समय पर कार्य नहीं करने, पटवार भवन पर ताला लटकाए रखने और सरकारी कामों के बदले पैसे मांगने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इस संबंध में 28 जनवरी 2026 को किसानों द्वारा एक लिखित शिकायत दी गई है, जिसमें पटवारी को दोबारा निलंबित करने की मांग की गई है।
पड़ताल में सामने आई किसानों की पीड़ा
अमर उजाला की स्पेशल टीम ने मामले की पड़ताल की, जिसमें किसानों की परेशानी और नाराजगी साफ तौर पर नजर आई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पटवारी भागीरथ चौधरी पटवार गृह पर शायद ही कभी मिलते हैं। किसी भी सरकारी कार्य के लिए वे किसानों को अपने निजी घर पर बुलाते हैं, लेकिन वहां भी सभी को मिलने की अनुमति नहीं देते।
घर पर होती है ‘डील’
किसानों का आरोप है कि पटवारी कुछ चुनिंदा लोगों को ही अपने घर बुलाते हैं और उन्हीं के माध्यम से किसानों से पैसे की मांग की जाती है। खेतों की सीमाज्ञान (बाउंड्री नॉलेज) जैसे जरूरी कामों को जानबूझकर टाल दिया जाता है, जिससे किसान महीनों तक कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
ज्यादा सवाल करने पर धमकी देने के आरोप
शिकायत में यह भी कहा गया है कि जब किसान अधिक पूछताछ करते हैं, तो उन्हें इधर-उधर भेजकर टरकाया जाता है। कई बार ‘राजकार्य में बाधा’ का मुकदमा दर्ज कराने की धमकी दी जाती है। पटवारी यह दावा करते हैं कि उनकी “ऊपर तक पहुंच” है और कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
मामला तब और गंभीर हो गया जब यह सामने आया कि पटवारी भागीरथ चौधरी को 26 दिसंबर 2023 को निलंबित किया गया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें दोबारा हल्का पटवारी के पद पर नियुक्त कर दिया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह नियुक्ति नियमों के खिलाफ है। इससे पहले भी किसानों ने उपखंड अधिकारी (एसडीएम) रियाबड़ी को ज्ञापन सौंपा था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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किसानों का आरोप: कृषि सेवाएं हो रहीं ठप
किसानों का कहना है कि पटवारी का रवैया पूरी तरह असंतोषजनक है। समय पर काम नहीं होने से भूमि रिकॉर्ड, सीमाज्ञान और अन्य कृषि संबंधी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्र में किसानों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। राजस्थान में पटवारी भूमि रिकॉर्ड, राजस्व और किसान सेवाओं की अहम कड़ी होते हैं, लेकिन भ्रष्टाचार और लापरवाही की शिकायतें अक्सर सामने आती रहती हैं। थांवला जैसे ग्रामीण इलाकों में किसान पहले से ही सूखा, फसल नुकसान और सरकारी योजनाओं में देरी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में पटवारी की कथित मनमानी उनकी मुश्किलों को और बढ़ा रही है।
मामले को लेकर अमर उजाला ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर चंपालाल जीनगर से बात की। उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता द्वारा पटवारी के खिलाफ लिखित शिकायत दी गई है, जिसमें सख्त कार्रवाई और दोबारा निलंबन की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि जांच के लिए पत्र जारी कर दिया गया है और जल्द ही जांच कर दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।