भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की पोलित ब्यूरो सदस्य एवं पूर्व सांसद वृंदा करात ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उदयपुर स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि यदि राम मंदिर में करोड़ों रुपये के सोना-चांदी और चढ़ावे से जुड़ा इतना बड़ा कथित घोटाला हुआ है तो केवल वाहन चालक और क्लर्क पर कार्रवाई कर मामले की लीपापोती नहीं की जा सकती। उन्होंने मांग की कि राम मंदिर ट्रस्ट को भंग कर जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए।
मोदी-शाह की चुप्पी पर उठाए सवाल
वृंदा करात ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी राम मंदिर के मुद्दे पर सत्ता में आई थी। ऐसे में यदि मंदिर ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के अध्यक्ष, सचिव और अन्य जिम्मेदार पदाधिकारियों की जवाबदेही तय किए बिना निष्पक्ष जांच संभव नहीं है।
वनाधिकार कानून और आदिवासी मुद्दों पर सरकार को घेरा
राजस्थान सरकार पर निशाना साधते हुए करात ने कहा कि प्रदेश में वनाधिकार कानून का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। आदिवासियों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है और बड़ी संख्या में वनाधिकार दावों का अब तक निस्तारण नहीं हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि आदिवासियों को न्याय दिलाने के लिए जल्द ही बड़ा जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।
विदेश नीति और ग्रेट निकोबार परियोजना पर भी उठाए सवाल
विदेश नीति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की विदेश नीति अमेरिका और इजरायल के प्रभाव में दिखाई देती है। साथ ही ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर उन्होंने कहा कि करोड़ों पेड़ों की कटाई से जैव विविधता को गंभीर नुकसान पहुंचेगा।
मनरेगा में 125 दिन रोजगार की मांग
मनरेगा को लेकर वृंदा करात ने कहा कि योजना को पहले की तरह प्रभावी रूप से लागू किया जाए, ग्रामीणों को 125 दिन का रोजगार मिले और पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करे। उन्होंने आरोप लगाया कि तकनीकी समस्याओं के कारण मजदूरों की हाजिरी तक दर्ज नहीं हो पा रही है, जिससे उन्हें बिना मजदूरी लौटना पड़ रहा है।
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नीट विवाद पर छात्रों के समर्थन का ऐलान
नीट परीक्षा विवाद पर उन्होंने कहा कि माकपा पीड़ित विद्यार्थियों के साथ खड़ी है और दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन का समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।