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सुख-आश्रय योजना: सुंदरनगर में 18 लाभार्थियों को 38 लाख रुपये, 40 बच्चों को मिल रही पॉकेट मनी
Ankesh Dogra
Updated Sun, 28 Jun 2026 11:26 AM IST
मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना अनाथ और बेसहारा बच्चों के जीवन में नई उम्मीद बनकर उभरी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वरोजगार और आर्थिक सहायता के माध्यम से यह योजना बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी प्रदान कर रही है। सुंदरनगर के कोहला गांव निवासी गौरव की कहानी इस योजना की सफलता का उदाहरण है, जिन्होंने सरकारी सहायता से अपना घर बनाकर नई शुरुआत की।
प्रदेश सरकार की 'सरकार ही माता, सरकार ही पिता' की सोच पर आधारित इस योजना के तहत 'चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट' को 27 वर्ष की आयु तक विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। सुंदरनगर उपमंडल में अब तक नौ लाभार्थियों को गृह निर्माण के लिए 20 लाख रुपये, छह लाभार्थियों को विवाह अनुदान के रूप में 12 लाख रुपये तथा तीन लाभार्थियों को स्वरोजगार के लिए छह लाख रुपये की सहायता दी जा चुकी है। इस प्रकार कुल 18 लाभार्थियों को 38 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।
सरकारी सहायता से बदली गौरव की जिंदगी
कोहला, डाकघर कनैड निवासी गौरव ने बताया कि कई वर्ष पहले माता-पिता के निधन के बाद उनका जीवन कठिन परिस्थितियों में गुजर रहा था। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से योजना की जानकारी मिलने पर उन्होंने बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय में आवेदन किया। योजना के तहत उन्हें घर निर्माण के लिए तीन लाख रुपये और विवाह के लिए दो लाख रुपये की सहायता मिली। इस सहयोग से उन्होंने अपना पक्का मकान बनाया। वर्तमान में वह निजी नौकरी के साथ खेती-बाड़ी कर आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं।
गौरव ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार जताते हुए कहा कि इस योजना ने उनके जैसे बेसहारा बच्चों को नया सहारा दिया है और सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर प्रदान किया है।
40 बच्चों को हर महीने मिल रही पॉकेट मनी
बाल विकास परियोजना अधिकारी सुंदरनगर पूनम चौहान ने बताया कि परियोजना क्षेत्र में 40 अनाथ बच्चों की पहचान की गई है, जिन्हें प्रतिमाह चार हजार रुपये पॉकेट मनी दी जा रही है। इसके अलावा चार बच्चों को उच्च शिक्षा, चार को व्यावसायिक प्रशिक्षण, तीन को स्वरोजगार, छह को विवाह अनुदान और नौ लाभार्थियों को गृह निर्माण सहायता का लाभ दिया गया है।
उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य अनाथ और बेसहारा बच्चों को आर्थिक सहायता के साथ शिक्षा, रोजगार और सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराना है।
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