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चीखें गूंजती रहीं, हाथों से हटता रहा मलबा...एक घंटे बाद आई जेसीबी
- न मजदूरों के सिर पर हेलमेट था, न बचाव दल के पास संसाधन
- सुरक्षा मानकों और आपदा प्रबंधक की पोल खुली
वीडियो स्टोरी/ श्रुृतिमान शुक्ल
बाराबंकी। एक तेज धमाका... फिर धूल का ऐसा गुबार कि कुछ पल तक किसी को समझ ही नहीं आया कि हुआ क्या है। अगले ही क्षण मलबे के नीचे दबे मजदूरों की चीखें गूंजने लगीं। कोई अपने साथी का नाम पुकार रहा था, कोई मदद के लिए हाथ बढ़ा रहा था, लेकिन कई टन वजनी कंक्रीट की स्लैब के सामने सब बेबस थे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस निर्माण स्थल पर दर्जनों मजदूर काम कर रहे थे, वहां किसी के सिर पर हेलमेट नहीं था। किसी ने सेफ्टी बेल्ट नहीं पहन रखी थी और न ही कोई अन्य सुरक्षा उपकरण नजर आया। स्लैब गिरते ही मजदूर सीधे कंक्रीट और लोहे के सरियों के नीचे दब गए।
हादसे के बाद सबसे पहले ग्रामीण मौके पर पहुंचे। किसी ने फावड़ा उठाया तो किसी ने हाथों से ही कंक्रीट हटानी शुरू कर दी। पुलिस भी पहुंच गई, लेकिन शुरुआती समय में उसके पास भी ऐसा कोई उपकरण नहीं था जिससे भारी स्लैब को काटकर या उठाकर मजदूरों तक पहुंचा जा सके। हर बीतते मिनट के साथ मलबे के नीचे से आती आवाजें कमजोर पड़ती जा रही थीं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, करीब एक घंटे तक जेसीबी और क्रेन का इंतजार होता रहा। मशीनें पहुंचने में हुई देरी के कारण राहत कार्य पूरी रफ्तार नहीं पकड़ सका। जब तक भारी मशीनें मौके पर पहुंचीं, तब तक कई मजदूर लंबे समय तक मलबे के नीचे फंसे रहे। यह हादसा सिर्फ एक निर्माणाधीन इमारत के गिरने का नहीं, बल्कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों और आपदा की स्थिति में त्वरित बचाव व्यवस्था की तैयारियों पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर गया है। खासकर उस जिले में जहां रोजाना हजारों निर्माण रोज हो रहे हैं।
एक घंटे बाद दिखा हाथ तो निकाले गए रामलखन
रेस्क्यू के दौरान कई बार ऐसा मंजर बना कि मलबे के नीचे से किसी के कराहने की आवाज सुनाई देती, लेकिन भारी स्लैब के कारण बचावकर्मी तुरंत वहां तक नहीं पहुंच पाते। करीब एक घंटे बाद रामलखन नामक मजदूर का हाथ मलबे के नीचे दिखा तो उसे जल्दी निकाला गया।
दो बच्चों को छोड़ गए नौशाद, परिवार बदहवास
इसी मलबे के नीचे त्रिवेदीगंज क्षेत्र के बद्दापर गांव निवासी नौशाद अली की जिंदगी भी खत्म हो गई। घंटों बाद जब उनका शव बाहर निकाला गया तो घटनास्थल पर सन्नाटा छा गया। नौशाद अपने पीछे दो छोटे बेटे रिजवान और इमरान छोड़ गए हैं। परिवार का सहारा छिनने से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
जैसे भूकंप आ गया...सांस लेना भी हुआ मुश्किल
मलबे से निकले मजदूर भाईलाल की आंखों में खौफ था। हांफते हुए बोले... इतनी जोर की आवाज हुई कि लगा जैसे भूकंप आ गया हो। कुछ समझ नहीं आया। देखते ही देखते पूरी छत हमारे ऊपर आ गई। चारों तरफ अंधेरा, धूल और लोगों की चीखें थीं। सांस लेना भी मुश्किल हो गया था।
कमेटी करेगी जांच: डीएम
डीएम ईशान प्रताप सिंह ने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की जाएगी। जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बिना सुरक्षा मानकों का पालन कराए यदि कहीं मजदूरों से काम कराया जाता पाया गया, तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए विशेष अभियान भी चलाया जाएगा।
होगी एफआईआर: एसपी
एसपी अर्पित विजयवर्गीय ने बताया कि 10 मजदूरों को मलबे से निकाला गया। मामले में एफआईआर दर्ज करने की तैयारी की जा रही है और तहरीर का इंतजार है। उन्होंने कहा कि फिलहाल प्रशासन और पुलिस की प्राथमिकता घायलों का बेहतर इलाज सुनिश्चित कराना है।
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