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Shimla News: हड़ताल पर न जाने के शपथ पत्र पर आयोग सख्त, नगर निगम से मांगा स्पष्टीकरण
शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 27 Jul 2026 04:36 PM IST
हिमाचल प्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने शिमला नगर निगम से सफाई कर्मचारियों और सुपरवाइजरों से हड़ताल पर नहीं जाने संबंधी लिए गए शपथ पत्र (एफिडेविट) के मामले में विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग ने इस संबंध में नगर निगम, प्रशासन और सफाई कर्मचारियों के बीच हुई बैठकों की कार्यवाही की रिपोर्ट भी तलब की है।
सोमवार को आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष कुलदीप कुमार धीमान ने की। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों की जो समस्याएं आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती हैं, उनका प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाएगा, जबकि अन्य मामलों को राज्य सरकार के समक्ष उठाया जाएगा।
बैठक के दौरान आयोग ने शिमला नगर निगम को सफाई व्यवस्था का नियमित औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए। आयोग का कहना था कि नियमित निरीक्षण से ही कार्य की गुणवत्ता में सुधार संभव है। साथ ही सफाई कार्य में आधुनिक तकनीक और ऑटोमेशन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया, ताकि कर्मचारियों को सिर या पीठ पर कूड़ा ढोने जैसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।
आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि सफाई कर्मचारियों को सभी निर्धारित सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए और उनके शोषण की किसी भी शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि महर्षि वाल्मीकि कामगार योजना के तहत पात्र परिवारों को आवास निर्माण के लिए तीन लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध है और पात्र लाभार्थियों को इसका लाभ उठाना चाहिए।
नगर निगम आयुक्त सचिन कंवल ने बैठक में बताया कि निगम में वर्तमान में 150 नियमित कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 483 पद स्वीकृत हैं। इसके अतिरिक्त सेहब सोसायटी के माध्यम से 931 कर्मचारी सफाई कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में सफाई कर्मचारियों को हजारों की संख्या में ग्लव्स, मास्क, रेनकोट और अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही महर्षि वाल्मीकि कामगार योजना के संबंध में जागरूकता शिविर आयोजित करने की भी जानकारी दी।
बैठक के दौरान विभिन्न कर्मचारी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी अपनी समस्याएं आयोग के समक्ष रखीं। गदर फ्रंट हिमाचल प्रदेश के संयोजक रवि कुमार दलित ने हड़ताल के दौरान सुपरवाइजरों को नौकरी से हटाए जाने का मुद्दा उठाया। वहीं सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधियों ने कर्मचारियों के जर्जर आवासों, स्थायी रोजगार और सुरक्षा उपकरणों की गुणवत्ता जैसे मुद्दों पर भी चिंता जताई।
आयोग ने स्पष्ट किया कि नगर निगम से स्पष्टीकरण और संबंधित रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद पूरे मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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