ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही का शिकार बच्चा भले ही जीवन की जंग हार गया हो, लेकिन वो कई सवाल जिम्मेदारों की व्यवस्था पर खड़ा कर गया। कलाधाम सोसाइटी देश के कलाकारों के लिए बनाई गई है। यहां पद्मश्री से लेकर राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित कलाकार रह रहे हैं। उनकी कला ने न केवल देश बल्कि विदेशों में भारत का माथा ऊंचा किया है लेकिन उनको अपने ही घर पर बदइंतजामी का शिकार होना पड़ रहा है। आरोप है कि यदि कलाकार अपनी कला को घर के बाहर प्रदर्शित करता है तो उन्हें धमकियां मिलती हैं। उनसे जुर्माना वसूला जाता है। जबकि कलाकार के लिए उनकी कला ही पहचान होती है।
सोसाइटी में रहने वाले कलाकारों ने आरोप लगाया है कि कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई इस सोसाइटी में अब उनका जीवन नारकीय होता जा रहा है। तीन से चार करोड़ रुपये मूल्य के स्टूडियो होने के बावजूद उन्हें मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। पूरी सोसाइटी में बदहाली का माहौल है। नालियों को लोहे की चादरों से ढका गया है, जो आए दिन हादसों का कारण बन रही हैं। इन पर चलने के दौरान लोग चोटिल हो रहे हैं। वहीं बिजली के खंभों पर खुले तार लटक रहे हैं, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। कई बार शिकायत करने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने कोई कदम नहीं उठाया।
कलाकारों की जमीन को बेचने का आरोप
सोसाइटी में 96 स्टूडियो हैं। सोसाइटी की एक तिहाई जमीन पर संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए केंद्र बनाया जाना था। जहां देश के कलाकार शांति में रहकर विभिन्न कलाओं का प्रदर्शन करते,लेकिन जिम्मेदारों ने उसे कैंसर अस्पताल को बेच दिया। आरोप है कि कई बार कलाकारों ने जाकर प्राधिकरण के अधिकारियों से इसे बचाने की गुहार लगाई। उसके बाद भी उनकी नहीं सुनी गई। कलाकारों के साथ लंबे समय से भेदभाव किया जा रहा है। अच्छा वातावरण तक उन्हें नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में कलाकारोेंं का यहां से घर छोड़कर जाना पड़ सकता है।
सबमर्सिबल के भरोसे चल रही सोसाइटी
सोसाइटी में रहने वाले आशुतोष तिवारी ने बताया कि लंबे समय से केवल प्राधिकरण को पानी का बिल दे रहे हैं लेकिन उन्हें पानी नहीं मिल रहा है। सोसाइटी में पानी का प्रेशर इतना कम आता है कि घरों में पानी की टंकियां भर ही नहीं पाती हैं। उन्होंने बताया कि सबमर्सिबल के भरोसे ही सोसाइटी चल रही है। सोसाइटी में पानी की समस्या वर्षों से कलाकार झेल रहे हैं। कई बार प्राधिकरण को पत्र लिखे गए लेकिन समाधान पर कोई काम नहीं किया गया। जब काम शुरु भी हुआ तो सोसाइटी की एक जान के साथ खिलवाड़ कर दिया गया।
क्या बोले लोग
सोसाइटी में प्राधिकरण की लापरवाही से ही बच्चे की मौत हुई है। अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। - पीएस राघव,निवासी
ललित कला अवार्ड से सम्मानित हूं। प्रतिदिन बच्चा दादू कहकर निकलता था। प्राधिकरण की लापरवाही ने बूढ़ापे में अकेला कर दिया। - राजेश शर्मा,निवासी
सोसाइटी के बगल में संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए केंद्र बनाया जाना था। उसे भी बेच दिया गया। कलाकारों के साथ बदसलूकी की जाती है। - दीपक कुमार,निवासी
नालियों को लोहे की चादरों से ढका गया है, जो आए दिन हादसों का कारण बन रही हैं। - रिचा आर्या,निवासी